भाजपा के इस लिस्ट में कई पुराने चेहरों की जगह नए और ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को तरजीह दी गई है, जिससे जमीनी स्तर के कार्यकर्ता काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री का दावा है कि इस बार भाजपा पिछली बार से भी शानदार परिणाम लेकर आएगी।
Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव का बिगुल बजते ही सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पहली बड़ी चाल चल दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि बीजेपी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने 88 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों को हरी झंडी दे दी है। इस सूची में केवल धेमाजी जिले की 'सिसिबोरगांव' सीट को अभी होल्ड पर रखा गया है।
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नए चेहरों पर दांव
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इस बार पार्टी ने टिकट बंटवारे में असम के सामाजिक ढांचे का भी पूरा ख्याल रखा है। उन्होंने कहा, "हमारी कोशिश रही है कि युवाओं, महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति के साथ-साथ नाथ समुदाय जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक समूहों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिले।"
गौरतलब है कि भाजपा के इस लिस्ट में कई पुराने चेहरों की जगह नए और ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को तरजीह दी गई है। मुख्यमंत्री का दावा है कि इस बार भाजपा पिछली बार से भी शानदार परिणाम लेकर आएगी।
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गठबंधन की तस्वीर साफ
असम की राजनीति में गठबंधन का समीकरण हमेशा निर्णायक रहा है। हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि भाजपा ने अपने पुराने साथी असम गण परिषद के लिए 26 सीटें छोड़ी हैं। आज एजीपी नेतृत्व के साथ मुख्यमंत्री की अहम बैठक हुई, जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि एजीपी और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट भी अपने उम्मीदवारों की सूची जल्द ही सार्वजनिक कर देंगे।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने आगे कहा, "गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने मुझे पत्र भेजा है और उन्होंने बक्सा की जिला न्यायाधीश के रूप में कार्यरत शर्मिला भुयान को जुबीन गर्ग मृत्यु मामले में दैनिक सुनवाई के लिए एक विशेष त्वरित सत्र न्यायालय की अध्यक्षता करने हेतु मनोनीत किया है। मैं गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के प्रति आभार व्यक्त करता हूं।"
कल 'सुपर फ्राइडे'
कल यानी शुक्रवार का दिन असम की राजनीति के लिए बेहद खास होने वाला है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद कल अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। उनके साथ राज्य के कई दिग्गज नेता और दर्जनों उम्मीदवार भी कल ही अपना पर्चा भरेंगे। शक्ति प्रदर्शन की इस तैयारी से साफ है कि बीजेपी पहले दिन से ही विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की फिराक में है।