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असम विधानसभा चुनाव: ‘हार्स ट्रेडिंग’ से डरी कांग्रेस ने जयपुर भेजे अपने प्रत्याशी

Sat, 10 Apr 2021 02:20 AM IST
गौरव पाण्डेय अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

  • नतीजे से पहले ही गठबंधन के दलों के साथ मिलकर बनानी शुरू की रणनीति
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कांग्रेस - फोटो : फाइल
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विस्तार
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असम में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने में भले ही अभी कई सप्ताह का वक्त है, लेकिन कांग्रेस और उसके गठबंधन वाले दलों को अपने खेमे में भाजपा के सेंध लगाने का खतरा पैदा हो गया है। करीबी नतीजे आने की स्थिति में अपने संभावित विधायकों की ‘हार्स ट्रेडिंग’ रोकने के लिए कांग्रेस ने अपने और गठबंधन के अन्य दलों के प्रत्याशियों को एहतियातन राजस्थान भेज दिया है। वहां इन सभी को परिणाम आने के बाद सरकार गठन तक जयपुर में सुरक्षा घेरे में रखा जाएगा। विधानसभा चुनावों के नतीजे 2 मई को आएंगे।

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हालांकि कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने के लिए राज्य से बाहर ले जाने को लेकर भी भाजपा पर ही हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इस सवाल का जवाब अमित शाह, सर्वानंद सोनोवाल और हिमांता बिस्वा सरमा से पूछना चाहिए। सवाल अच्छा है, सही है लेकिन आप जिससे पूछ रहे हैं, वह आदमी गलत है। सुरजेवाला ने कहा कि जब प्रजातंत्र का द्रोपदी की तरह चीरहरण हो तो उसकी रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण की तरह खड़े तो होना पड़ेगा।

दरअसल कांग्रेस को परिणाम आने के बाद अपने जीतने वाले विधायकों के पाला बदलकर भाजपा में जाने की भनक लगी थी। इसके बाद असम के प्रभारी जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय नेतृत्व की सलाह पर उन्हें राजस्थान में रखने की योजना बनाई। जितेंद्र भी राजस्थान से ही हैं। उन्होंने राजस्थान के कांग्रेस नेताओं से बातचीत करने के बाद अपने प्रत्याशियों के साथ ही गठबंधन के साथी एआईयूडीएफ के भी कुछ उम्मीदवारों को राजस्थान भेजने की योजना तैयार की। इसके बाद 22 उम्मीदवारों को जयपुर के फेयरमॉन्ट होटल में भेज दिया गया है। अगले एक-दो दिन कुछ और कांग्रेस उम्मीदवार भी भेजे जाने की योजना है। असम में तीन चरणों में  6 अप्रैल को मतदान खत्म हो चुका है।
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पुराने इतिहास के कारण बेचैन है पार्टी
दरअसल कांग्रेस असम में पुराने इतिहास के कारण बेचैन है। भाजपा विपक्षी दलों के नाराज नेताओं की मदद से ही सत्ता में पहुंची है। पहले राज्य में भाजपा के  पांच विधायक थे, लेकिन कांग्रेस के  पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के करीबी हिमांता बिस्वा सरमा ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। नतीजतन पांच साल बाद हुए साल 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कांग्रेस को बड़े अंतर से हरा दिया था। हिमांता के अब भी राज्य कांग्रेस के कई नेताओं से अच्छे संबंध हैं। यही कारण है कि कांग्रेस नतीजे घोषित होने से पहले अपने कील कांटे मजबूत कर रही है। 
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