फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Assam Election: 126 सीटें, तीन असम; भूगोल में बंटी राजनीति, इलाकों में पहचान की लड़ाई; परिसीमन से बदला समीकरण

सार

असम के चुनाव को केवल 126 विधानसभा सीटों की सीधी लड़ाई के रूप में देखा जाए, तो तस्वीर अधूरी रह जाती है। दरअसल, यह चुनाव तीन अलग-अलग असम यानी ऊपरी, मध्य और निचले असम की जटिल राजनीतिक जंग है, क्योंकि यहां हर क्षेत्र का सामाजिक ढांचा, मुद्दे और वोटिंग पैटर्न एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।
विज्ञापन
असम चुनाव का भूगोल-गणित - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राज्य की 126 सीटों में से ऊपरी असम में 35, मध्य असम (बोडोलैंड क्षेत्र सहित) में 41 और निचले असम में 50 सीटें आती हैं। 2021 के चुनाव में ऊपरी असम ने भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बढ़त दी, वहीं निचले असम में मुकाबला बराबरी का रहा और मध्य असम ने सत्ता का संतुलन तय किया। मध्य असम में बोडोलैंड क्षेत्र भी शामिल है। 2023 के परिसीमन के बाद बदली सीट संरचना, सीमावर्ती जिलों में पहचान की राजनीति और नए मतदाताओं के जुड़ने से इस बार चुनावी समीकरण और भी पेचीदा हो गया है। यह विभाजन केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक है। हर क्षेत्र का अपना चुनावी चरित्र और सत्ता का समीकरण है। इसे असम की पूरी राजनीतिक गणित से ही समझा जा सकता है।
विज्ञापन

 
2021 में थी ऐसी स्थिति वोट %  
एनडीए 75 सीट (59.5%) भाजपा : 33%
कांग्रेस गठबंधन 50 सीट (39.7%) कांग्रेस: 30%
अन्य एक सीट (0.8%) एआईयूडीएफ 9%

यानी...सीटों में बड़ा अंतर, लेकिन वोट शेयर में ज्यादा फर्क नहीं।

2026 में निर्णायक फैक्टर
  • परिसीमन का असर नए मतदाता बनाम हटे नाम
  • बोडोलैंड में क्षेत्रीय दलों की भूमिका
  • ऊपरी असम में भाजपा का इम्तिहान।
निचला असम: बांग्लादेश से सटे क्षेत्र में बराबरी की लड़ाई
कुल सीटें 50
एनडीए 23 सीटें (46 फीसदी)
कांग्रेस+एआईयूडीएफ  27 सीटें (54%)
विज्ञापन

धुबरी, बारपेटा, गोलपाड़ा जैसे मुस्लिम बहुल जिलों वाला यह क्षेत्र बांग्लादेश सीमा से सटा हुआ है। यहां पहचान की राजनीति हावी रहती है। यह क्षेत्र में कांग्रेस व एआईयूडीएफ का प्रभाव मजबूत है, लेकिन भाजपा भी कड़ी टक्कर देती है। एआईयूडीएफ को असम में 16 सीटें मिली थीं, जिनमें से अधिकांश यहीं से आई थीं।
 
ऊपरी असम: भाजपा की चुनावी रीढ़ - कुल सीटें- 35 - 2021 में प्रदर्शन
एनडीए 30 सीटें (85.7%)
कांग्रेस गठबंधन   5 सीटें (14.3%

भाजपा को यहीं से सत्ता की ठोस बढ़त मिलती है। तिनसुकिया, शिवसागर, डिब्रूगढ़, जोरहाट जैसे जिलों वाला इलाका सियासी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। परिसीमन के बाद जनजातीय आबादी बढ़ना भाजपा के लिए लाभप्रद माना जा रहा है।
 
मध्य असम: सत्ता का टर्निंग प्वाइंट - कुल सीटें : 41 - 2021 में प्रदर्शन
एनडीए 22 सीटें (53.7%)
कांग्रेस गठबंधन 16 सीटें (39.0%)
अन्य (यूपीपीएल बीपीएफ) 3 सीटें (7.3 फीसदी)

यहां क्षेत्रीय दल कई सीटों पर किंगमेकर बनते हैं। इसमें नगांव, मोरीगांव के साथ बोडोलैंड क्षेत्र शामिल है, जहां जातीय और क्षेत्रीय राजनीति का असर दिखता है। परिसीमन ने राजनीति को नया आकार दिया है। कई सीटों की सीमाएं बदल गई हैं, तो सीटों का पुनर्गठन और संतुलन भी बदला हुआ है। एसटी सीटों की संख्या बढ़ी है तो मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी संरचनागत बदलाव आया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें