असम में कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार सुरेन दैमरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि उन्होंने मतदान से पहले पार्टी छोड़कर धोखाधड़ी की और पार्टी फंड का दुरुपयोग किया। दैमरी ने सहयोग न मिलने का आरोप लगाया। वहीं, चुनाव आयोग ने कहा कि नाम वापस लेने की समय सीमा खत्म हो चुकी थी।
असम विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी ने अपने ही उम्मीदवार सुरेन दैमरी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि उन्होंने मतदान से एक दिन पहले पार्टी छोड़कर न सिर्फ अनुशासन तोड़ा, बल्कि पार्टी की छवि को भी नुकसान पहुंचाया। इस घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।
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कांग्रेस ने अपनी शिकायत में सुरेन दैमरी पर धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि दैमरी ने पहले टिकट लिया, नामांकन दाखिल किया और चुनाव प्रचार भी किया, लेकिन मतदान से ठीक पहले अचानक इस्तीफा देकर पार्टी के खिलाफ बयान देने लगे। कांग्रेस का दावा है कि उन्हें भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए उकसाया गया।
क्या था पूरा विवाद?
कांग्रेस के अनुसार, दैमरी ने टिकट मिलने के बाद पार्टी के चुनाव चिन्ह पर प्रचार किया था। लेकिन मतदान से एक दिन पहले उन्होंने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। इससे पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ और चुनावी रणनीति पर असर पड़ा।
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क्या पैसों के दुरुपयोग का भी आरोप है?
पार्टी ने दावा किया कि चुनाव प्रचार के लिए दैमरी को 30 लाख रुपये दिए गए थे। आरोप है कि इस्तीफा देकर उन्होंने इस रकम का गलत इस्तेमाल किया और पार्टी के साथ विश्वासघात किया।
दैमरी ने क्या सफाई दी?
सुरेन दैमरी ने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें कोई सहयोग नहीं दिया। उनका आरोप है कि पार्टी नेतृत्व ने उनकी बात तक नहीं सुनी और उन्हें अकेला छोड़ दिया गया। इसी कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।
क्या नाम वापस लेना संभव था?
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने साफ किया कि नाम वापस लेने की समय सीमा पहले ही खत्म हो चुकी थी। ऐसे में दैमरी का नाम ईवीएम में बना रहा और वह चुनावी मैदान में उम्मीदवार बने रहे। उदलगुड़ी सीट पर मतदान के दौरान करीब 80.68 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई।