असम में बाल विवाह के खिलाफ जोरशोर से अभियान चल रहा है जिसकी निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कर रहे हैं। वहीं अब राज्य के पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने शुक्रवार को कहा कि पिछले महीने सामाजिक बुराई पर सरकार की कार्रवाई के बाद से असम में बाल विवाह के 4,300 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और अब तक 889 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
अब तक 889 मामलों में चार्जशीट दाखिल
जीपी सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बाकी मामलों में भी आरोपपत्र अप्रैल के अंत तक संभव हो जाएगा। मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए असम के डीजीपी ने कहा कि हमने तीन फरवरी से बाल विवाह के 4,363 मामले दर्ज किए हैं। हमने अब तक 889 मामलों में चार्जशीट दाखिल की है।
राज्य सरकार ने तीन फरवरी को बाल विवाह पर कार्रवाई शुरू की थी, जिससे 28 फरवरी तक 4,262 मामले दर्ज किए गए और 3,145 गिरफ्तारियां हुईं। राज्य के वित्त मंत्री अजंता नियोग ने गुरुवार को विधानसभा में बजट पेश करते हुए 2026 तक बाल विवाह को खत्म करने के लिए 200 करोड़ रुपये के राज्य मिशन की घोषणा की।
असम में मातृ और शिशु मृत्यु दर की उच्च दर है
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की रिपोर्ट के अनुसार, असम में मातृ और शिशु मृत्यु दर की उच्च दर है, बाल विवाह प्राथमिक कारण है। वहीं इससे पहले असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि राज्य में बाल विवाह के खिलाफ राज्य सरकार के चल रहे अभियान के दौरान धर्म को नजरअंदाज करते हुए कार्रवाई की जा रही है। सरमा ने आंकड़ा भी पेश किया। बताया कि तीन फरवरी की कार्रवाई तक मुसलमानों और हिंदुओं की गिरफ्तारी का अनुपात लगभग बराबर ही है।