असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि उल्फा (स्व.) के साथ शांति वार्ता तब तक संभव नहीं होगी, जब तक संगठन के नेता परेश बरुआ संप्रभुता की अपनी मांग को छोड़ नहीं देते। उन्होंने कहा, उल्फा (स्व) के साथ शांति वार्ता के लिए बैठना कोई मुद्दा नहीं है। लेकिन संगठन को वार्ता की मेज पर लाना सबसे कठिन हिस्सा है। एक दिन पहले ही असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम के लोगों से परेश बरुआ पर नैतिक दवाब बनाने का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा, जब तक परेश बरुआ संप्रभुता की मांग करते रहेंगे, तब तक उल्फा (स्व.) के साथ किसी भी तरह की शांति वार्ता संभव नहीं है। उल्फा (स्व.) की संप्रभुता की मांग ही विवाद की जड़ है। सरमा ने कहा, उल्फा (स्व.) के साथ बातचीत के रास्ते खुले हैं और असम सरकार मामले को सुलझाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। दशकों पुरानी उल्फा उग्रवाद समस्या को हल करने में असम के लोगों की बड़ी भूमिका है। उल्फा (स्व.) के प्रमुख परेश बरुआ समय-समय पर संगठन की संप्रभुता की मांग पर जोर देते रहे हैं। उल्फा (स्व.) ने कई मौकों पर कहा है कि शांति वार्ता शुरू करने के लिए संप्रभुता का मुद्दा एजेंडे में शामिल होना चाहिए।