असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि असम सरकार ग्वालपाड़ा सैनिक स्कूल के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए हरसंभव सहयोग करेगी। सरमा ने कहा, विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें साकार करने के लिए मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को उनकी क्षमता से परिचित कराने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में मेरे पास निवेश करने से पहले यह गारंटी भी होनी चाहिए कि स्कूल से कम से कम 10 विद्यार्थी हर साल एनडीए (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) की परीक्षा पास करेंगे। यह स्कूल ग्वालपाड़ा से 18 किलोमीटर दूर स्थित है और 12 नवंबर 1964 में स्थापित किया गया था। सेना की पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता इस स्कूल के पूर्व छात्र हैं। वह भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
इस मौके पर जनरल कलिता ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए उन्हें जिस भी क्षेत्र में जाने का चुनाव किया उसमें उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने एक कैडेट के रूप में बिताए समय को और अनुभवों को साझा किया। इससे पहले मुख्यमंत्री के आगमन पर स्कूल के कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। स्कूल के प्रिंसिपल कर्नल वाईएस परमार ने अतिथियों का स्वागत किया और स्कूल की उपलब्धियों और इसकी भविष्य की योजना की जानकारी दी। अभिनंदन समारोह में डॉ. सरमा और लेफ्टिनेंट जनरल कलिता को ग्यारहवीं कक्षा के कैडेट आदित्य तमांग और कैडेट नीरज कुमार द्वारा बनाए गए चित्र भेंट किए।
इस दौरान लगभग 350 कैडेटों की बैठने की क्षमता वाले एक नवनिर्मित एम्फीथिएटर का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने किया। लेफ्टिनेंट जनरल आरपी कलिता ने स्कूल के सभागार के पास बने बॉक्सिंग रिंग का उद्घाटन किया।