असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को मदरसों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मदरसों जैसे धार्मिक संस्थानों में प्रवेश की अनुमति केवल उस उम्र में दी जानी चाहिए जब छात्र अपने फैसले खुद ले सकें। उन्होंने कहा कि मदरसा शिक्षा की एक प्रणाली होनी चाहिए जो छात्रों को भविष्य में कुछ भी करने का विकल्प दे सकें। किसी भी धार्मिक संस्थान में प्रवेश उस उम्र में होना चाहिए जहां वे अपने निर्णय खुद ले सकें।
भाजपा ने लगाया था आरोप
गौरतलब है कि मार्च में भारतीय जनता पार्टी की असम इकाई ने आरोप लगाया था कि सरकारी मदरसों की तर्ज पर राज्य के कई निजी मदरसों में 'राष्ट्र-विरोधी गतिविधियां' चल रही है। इतना ही नहीं बीजेपी ने प्रशासन से उन निजी मदरसों में शिक्षा प्रदान किए जाने पर कड़ी निगरानी रखने का आग्रह किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस्लामिक आतंकी संगठन 'अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट' चार-चपोरी (नदी) क्षेत्रों में स्थित मदरसों में स्लीपर सेल के रूप में एक विस्तृत नेटवर्क को कवर करने के रूप में उभरा है। इस प्रक्रिया ने पिछले कुछ वर्षों में गति पकड़ ली है।
हाल ही में असम पुलिस द्वारा बारपेटा जिले के चाकलियापारा मदरसा से पांच युवकों की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए भाजपा ने कहा था कि पुलिस ने राज्य के चार-चपोरी क्षेत्रों के अधिकांश मदरसों में चरमपंथी संगठन के व्यापक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
गोहाटी उच्च न्यायालय ने असम निरसन अधिनियम 2020 की वैधता को रखा है बरकरार
गोहाटी उच्च न्यायालय ने मदरसा शिक्षा प्रक्रियाकरण अधिनियमों को निरस्त करने के लिए असम निरसन अधिनियम 2020 की संवैधानिक वैधता को फरवरी में सुनवाई के बाद बरकरार रखा था। मुख्य न्यायाधीश सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया की खंडपीठ ने कहा कि राज्य द्वारा वित्त पोषित मदरसे अल्पसंख्यक संस्थान हैं और अल्पसंख्यकों द्वारा स्थापित और प्रशासित किए गए थे, यह केवल एक दावा है जिसका कोई आधार नहीं है और इसलिए यह स्वीकार्य नहीं है। दरअसल, असम सरकार एक कानून लाई थी जिसने सभी सरकारी मदरसों को उच्च प्राथमिक, उच्च और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में परिवर्तित कर दिया था।
रेल पटरियों की मरम्मत के लिए 180 करोड़ किए स्वीकृत
केंद्र सरकार ने असम के पर्वतीय जिले डीमा हसाउ में बाढ़ और भूस्खलन से क्षतिग्रस्त रेल पटरियों की मरम्मत के लिए 180 करोड़ स्वीकृत किए हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को केंद्र की ओर से मरम्मत कार्यों के लिए 180 करोड़ रुपये आवंटन की पुष्टि की। सरमा ने कहा, रेलवे मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि इस साल दस जुलाई तक डीमा हसाउ में पटरियों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया जाएगा। क्षतिग्रस्त पटरियों को दुरुस्त करने से बराक और ब्रह्मपुत्र घाटियों के बीच रेल संपर्क बहाल हो जाएगा, जिससे त्रिपुरा, मिजोरम और मणिपुर भी देश के अन्य हिस्से से जुड़ जाएंगे। इससे पहले, मुख्यमंत्री सरमा ने रविवार को रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से नई दिल्ली में मुलाकात की। पटरियों के क्षतिग्रस्त होने के कारण पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने लमडिंग-बदरपुर खंड में रेल सेवाएं रद्द कर दी हैं।