असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा और बोडोलैंड पीपुल्स पार्टी (बीपीएफ) के बीच हुआ सियासी तलाक अप्रत्याशित नहीं है। इसकी पटकथा बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) के चुनाव में ही लिखी जा चुकी थी। बोडो समुदाय में पैठ बनाने के लिए भाजपा ने न सिर्फ सहयोगी दल बीपीएफ के खिलाफ चुनाव लड़ा, बल्कि बीपीएफ की प्रतिद्वंद्वी यूपीपीएल के साथ बीटीसी पर कब्जा भी किया।
बनाए नए सहयोगी
पिछले विधानसभा चुनाव में बीपीएफ एनडीए के साथ थी, जबकि यूपीपीएल कांग्रेस गठबंधन के साथ। अब यूपीपीएल एनडीए में है तो बीपीएफ कांग्रेस गठबंधन के साथ। बोडो प्रभुत्व वाले चार जिलों में सियासी घाटे को पाटने के लिए भाजपा ने यूपीपीएल के अलावा गण सुरक्षा पार्टी (जीएसपी) को भी साधा है। इन दोनों दलों का बोडो बाहुल्य क्षेत्र में प्रभाव है।