असम के गुवाहाटी में एक समारोह में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के विभिन्न गुटों के 1,615 कैडरों ने अपने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया है। भारत सरकार ने 27 जनवरी को दिल्ली में एनडीएफबी के समूहों और असम सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
इससे पहले असम सरकार को 23 जनवरी को बड़ी कामयाबी हाथ लगी थी। आठ प्रतिबंधित संगठनों के कुल 644 उग्रवादियों ने 177 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया था। पुलिस के मुताबिक, नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ बंगाली (एनएलएफबी), आदिवासी ड्रैगन फाइटर (एडीएफ), नेशनल संथाल लिबरेशन आर्मी (एनएसएलए), यूनाईटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंस (यूएलएफए-आई), नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी), कामतापुर लिबरेशन आर्गेनाइजेशन (केएलओ), रवा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (आरएनएलएफ) और कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-माओवादी (सीपीआई-एम) के सदस्य रहे इन उग्रवादियों ने एक कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की उपस्थिति में आत्मसमर्पण किया।
पुलिस महानिदेशक ज्योति महंत ने बताया था कि यह राज्य और असम पुलिस के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। कुल मिलाकर 644 कैडर और आठ उग्रवादी समूहों के नेताओं ने हथियार डाल दिए। उन्होंने कहा कि यह हाल के दिनों में उग्रवादियों के सबसे बड़े आत्मसमर्पण में से एक है।
महंत ने बताया था कि इन उग्रवादियों ने एके- 47 और एके-56 जैसे कई हथियार सौंपे हैं। 177 हथियारों के अलावा उग्रवादियों ने 58 मैगजीन, 1.93 किलो विस्फोटक, 52 ग्रेनेड, 71 बम, तीन रॉकेट लॉन्चर, 306 डेटोनेटर, दो आरटी सेट और 17 खुखरी भी सौंपी।
सबसे ज्यादा एनएलएफबी के 301 उग्रवादियों ने किया समर्पण
एनएलएफबी के सबसे ज्यादा 301 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद एडीएफ के 178, एनएसएलए के 87, उल्फा-आई के 50, एनडीएफबी के 8, केएलओ के 6, आरएनएलएफ के 13 और कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के एक उग्रवादी ने आत्मसमर्पण किया था।