इंसानी बच्चों की तरह एशियन हाथी के बच्चे भी हाईटेक हो रहे हैं। कम से कम हाथी के बच्चों की गतिविधियों का अध्ययन करने वाले शोधार्थियों ने तो यही नतीजा निकाला है। पहले सूड़ का प्रयोग जिस तरह से हाथी वयस्क होने पर करते थे अब पैदा होते ही नन्हें हाथी अपनी सूंड को तय दिशा में प्रयोग में महारत रख रहे हैं, यानि ठेठ मनुष्य के बच्चों की तरह पैदा होते ही वह भी खासे चेतन्य हो रहे हैं।
कर्नाटक में हाथियों के बच्चों पर किए गए अध्ययन से वैज्ञानिकों को इस दिलचस्प जानकारी का पता लगाया है। जवाहरलाल नेहरु सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च के शोधकर्ताओं ने दिसंबर 2015 से दिसंबर 2017 तक नागरहोल और बांदीपुर नेशनल पार्क में किए गए प्रोजेक्ट में 11 अलग अलग समूहों के 30 शिशु हाथियों को देखा। इसमें उनके सूढ़ यानि अपनी ट्रंक के उपयोग में साइड प्रिफरेंस, उपयोग में तत्परता के विकास के साथ साथ विभिन्न सामाजिक और गैर सामाजिक व्यवहारों के विकास का अध्ययन किया गया।
इस अध्ययन में पाया गया कि हाथी एक सामाजिक प्राणी है जो झुंड में रहता है। ज्यादातर समूहों में नन्हें हाथी मातृवंश के नेतृत्व में रहते हैं और उनकी छत्रछाया में एक शिशु हाथी बड़ा होता है। उसे अपनी सूढ़ की गतिविधियों पर नियंत्रण में समय लगता है। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान देखा की एक नवजात हाथी कम से कम छह माह में अपनी सूढ़ पर नियंत्रण कर घास को तत्परता से उखाड़ने में सक्षम होता एक वयस्क की भांति।