उत्तराखंड के नैनीताल के मल्लीताल स्थित एशिया के सबसे पुराने मैथोडिस्ट चर्च के पुराने पादरी निवास को कब्जे की समस्या से आजिज आकर बेचने का फैसला किया गया है। राष्ट्रीय विरासत वाले चर्च के मूल स्वरूप में बदलाव कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अजय रावत ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसकी शिकायत कुमाऊं कमिश्नर से की है।
नैनीताल में 21 सितंबर, 2016 को हुई बिशप डॉ. अनिल कुमार सर्वांद और उत्तर भारत के पादरियों की बैठक में 159 साल पुराने सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च के संबंध में एक अहम फैसला किया। डिस्ट्रिक्ट सुपरिंटेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कई साल से पुराने पादरी निवास पर कई लोगों ने कब्जा किया हुआ है।
इसी आधार पर बैठक में सर्वसम्मति से चर्च की संपत्ति को बेचने का फैसला किया गया। बैठक में मैथोडिस्ट चर्च नैनीताल के पादरी आशुतोष दानी भी थे, हालांकि उक्त फैसले बारे में पूछने पर दानी ने इस सार्वजनिक संपत्ति को बेचने से इनकार किया है। जबकि डॉ. रावत ने दावा किया कि दिसंबर, 2016 में चर्च कमेटी के इस फैसले पर मैथोडिस्ट चर्च के रीजनल एक्जीक्यूटिव बोर्ड ने मुहर लगा दी है।