अपने अफसरों के खिलाफ गबन मामले की सीबीआई जांच और खुद की हिफाजत के लिए पिस्टल मांगने वाले सीआरपीएफ के एएसआई को कथित तौर पर नजरबंद कर दिया गया है और उसका मोबाइल फोन भी छीन लिया है। एएसआई को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी मिल रही है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि गुवाहाटी स्थित सीआरपीएफ के ग्रुप सेंटर के डीआईजी द्वारा अनुशासन के नाम पर एएसआई को शारीरिक और मानसिक तौर से प्रताड़ित किया जा रहा है। 14 सितंबर 2018 को दोपहर तीन बजे के बाद से एएसआई का मोबाइल फोन स्विच ऑफ है।
एएसआई ने क्या लिखा था अपने पत्र में, यह है पूरा मामला
सीआरपीएफ के सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) सुनील कुमार ने अपने ही अफसरों पर कथित तौर से बजट राशि में बड़े पैमाने पर गबन करने का आरोप लगाया था। आरोपों के मुताबिक, गुवाहाटी में सीआरपीएफ एक मोंटेसरी स्कूल चलाती है। इस स्कूल के बजट में कमांडेंट एवं डीआईजी स्तर के अधिकारियों ने कथित तौर पर गबन किया है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह को भेजी गई शिकायत में साफ लिखा है कि स्कूल बजट के अलावा भंडार शाखा, मोटर परिवहन शाखा एवं भवन शाखा में भी बड़े पैमाने पर गोलमाल किया गया है। सीआरपीएफ के अफसरों ने कई मामलों में गोलमाल कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का चूना लगा दिया है।
इस केस में अगर सीबीआई जांच कराई जाए तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। सीआरपीएफ के ग्रुप सेंटर पर यह गोलमाल कई वर्षों से चल रहा है। आरोप है कि अफसरों ने स्कूल की फीस में से करीब चार लाख रुपये की राशि गलत तरीके से हड़प ली। जब यह मामला कोर्ट में पहुंचा तो आरोपियों की पोल खुल गई। उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उक्त राशि बैकडेट से स्कूल खाते में जमा करा दी। आरोपियों में से एक अफसर जो कि अब डीआईजी बनकर दूसरी जगह पोस्टिंग ले चुका है, उसने जाते-जाते अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मिनिस्ट्रयिल शाखा के एएसआई सुनील कुमार पर वह राशि डलवा दी। मतलब, सुनील कुमार अपने वेतन से चार लाख रुपये उन अफसरों को दे। एएसआई पर दबाव डाला गया कि वह इस मामले को अपने सिर पर ले ले।
जब उसने अपने अफसरों की बात नहीं मानी तो एएसआई की जांच बैठा दी गई। खास बात यह है कि नौ माह बाद भी उसकी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई। एएसआई ने आरटीआई के माध्यम से जांच रिपोर्ट जानने का प्रयास किया तो उसमें भी कोई जवाब नहीं मिला। अब एक बार फिर उसने आरटीआई लगाकर अपनी जांच रिपोर्ट मांगी है। शिकायतकर्ता का दावा है कि वह सीबीआई के सम्मुख तमाम सबूत पेश कर सकता है।
सुनील कुमार ने अपने पत्र में दावा किया है कि अगर इस मामले की जांच सीबीआई से होती है तो वह केस से जुड़े तमाम साक्ष्य जांच एजेंसी के सम्मुख प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। इस अधिकारी ने केंद्रीय गृहमंत्री को साफ तौर पर बता दिया था कि इस मामले में उसे अपनी जान का खतरा है। चूंकि आरोप बड़े अफसरों पर लगे हैं, इसलिए उसे किसी भी तरह से जान-माल का नुकसान पहुंचाया जा सकता है। सुनील कुमार ने गृहमंत्री एवं सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर गुवाहाटी के डीआईजी से खुद की सुरक्षा के लिए 9 एमएम का पिस्टल (सरकारी) जारी करने की मांग की थी।
14 सितंबर को डीआईजी इतना कुछ बोले थे, आज कुछ नहीं बोले
गुवाहाटी के सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर में तैनात डीआईजी सीटी वैंक्टेश से 14 सितंबर को जब उनके मोबाइल फोन पर बातचीत की गई तो बोले, हां हां मैं सुनील कुमार को जानता हूं, उनका केस मेरे पास आया है। जब उन्हें बताया गया कि शिकायत केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पास भेजी गई है। यह सुनते ही डीआईजी साहब थोड़ा हड़बड़ा गए और बोले, मुझे कुछ नही मालूम। आप सुनील कुमार से ही पूछ लें। मैं कुछ नहीं जानता, कौन सी शिकायत है, मेरे संज्ञान में कुछ नहीं है। मंगलवार यानी 18 सितंबर को जब इस बाबत डीआईजी वैंक्टेश से एक बार फिर उनके मोबाइल फोन पर बातचीत की गई तो वे कुछ नहीं बोले। केवल इतना कहा, मैं इस मामले में कोई बात नहीं करूंगा। फिर बात करेंगे, यह कह कर उन्होंने फोन काट दिया।
गुवाहाटी के आईजी साहब बोले, अनुशासन है, बहुत सी बातें बाहर नहीं आ सकती।
इस केस को लेकर जब गुवाहाटी में सीआरपीएफ के आईजी प्रकाश (जिनके अधिकार क्षेत्र में यह मामला आता है) से उनके मोबाइल फोन पर बात की गई तो वे अनुशासन का पाठ पढ़ाने लगे। हमने उन्हें बताया कि यह एक एएसआई के जीवन से जुड़ा मामला है, तो बोले मेरे दायरे में यह सब नहीं आता है। फिर कहने लगे, फोर्स है इसमें कुछ अनुशासन रखना पड़ता है। बहुत सी बातें हैं जो पब्लिक में नहीं आ सकती। अनुशासन के नाम पर बहुत कुछ संभव है। आप डीआईजी से बात कर लें, वे जिनता जरूरी होगा, उतना बता देंगे।
डीजी राजीव राय भटनागर को एसएमएस और ई-मेल के जरिए इस मामले की जानकारी दी है, मगर कुछ नहीं बोल रहे हैं। दिल्ली के सीजीओ स्थित सीआरपीएफ मुख्यालय में डीजी राजीव राय भटनागर को उनके मोबाइल फोन पर 17 सितंबर को एसएमएस के जरिए इस सारे मामले की जानकारी दी गई है। एसएमएस में लिखा है कि आप इस फोर्स के मुखिया है, मुसीबत की घड़ी में जवान या अफसर आप की ओर ही देखते हैं। ये सब बातें उनकी ई-मेल पर भी लिखकर भेजी गई हैं। अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।