केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कई वैश्विक कंपनियां देश के युवाओं की रचनात्मक ऊर्जा इस्तेमाल करने के लिए नवघोषित भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के साथ काम करने की बेहद इच्छुक हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री वैष्णव ने यह टिप्पणी सात प्रमुख कंपनियों जियोस्टार, गूगल, एडोब, मेटा, एपल, एनवीडिया और माइक्रोसॉफ्ट की ओर से विश्व दृश्य-श्रव्य एवं मनोरंजन शिखर सम्मेलन (वेव्स) के दौरान आईआईसीटी के साथ आशय पत्रों (शुरुआती समझौता, जो पक्षों के बीच संभावित लेन-देन की सहमति जताता है) के आदान-प्रदान के बाद की। वैष्णव ने कहा कि संस्थान एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी (एवीजीसी-एक्सआर) क्षेत्र के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र बनने के लिए तैयार है। पहले से ही सातों कंपनियां आईआईसीटी के साथ सहयोग कर रही हैं। आईआईसीटी हमारे युवा रचनाकारों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम करेगी।
भारत में मीडिया व मनोरंजन जगत का नेतृत्व करने की क्षमता
वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आईआईसीटी के साथ सहयोग के लिए विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के साथ भी बात चल रही है। उन्होंने शुक्रवार को डब्ल्यूआईपीओ के महानिदेशक डैरेन टैंग के साथ बैठक की थी। आईआईसीटी की स्थापना सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से व्यापार निकाय फिक्की और उद्योग निकाय सीआईआई के साथ रणनीतिक सहयोग से प्रतिष्ठित आईआईटी और आईआईएम की तर्ज पर एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में की जा रही है। वैष्णव ने कहा, भारत में मीडिया और मनोरंजन की दुनिया में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाने की क्षमता है। यह संस्थान उस दिशा में पहला कदम है।
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व्यापक बदलाव से गुजर रही रचनात्मकता की दुनिया
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार, भारत में 4 करोड़ क्रिएटर हैं। इस जीवंत समूह ने ‘क्रिएट इन इंडिया’ चुनौतियों में बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। वेव्स के इस पहले संस्करण में 60 देशों के एक लाख से अधिक क्रिएटर शामिल हुए। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता की दुनिया व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रही है, क्योंकि प्रौद्योगिकी इस क्षेत्र का लोकतंत्रीकरण कर रही है। सामग्री (कंटेंट) बनाने का तरीका बदल रहा है और इसका इस्तेमाल करने का जरिया भी बदल रहा है।
- वैष्णव ने कहा, वेव्स का उद्देश्य दुनियाभर के रचनाकारों को एक मंच प्रदान करना है। यह नई तकनीकों से परिचित कराएगा। वेव्स रचनाकारों को निवेशकों, उत्पादकों और खरीदारों से जोड़ेगा। इससे नए आर्थिक अवसर पैदा होंगे।
जियोस्टार ने तीन साल में कंटेंट में किया 84,576 करोड़ का निवेश
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म जियोस्टार के उपाध्यक्ष उदय शंकर ने वेव्स में कहा कि कंपनी ने तीन साल की अवधि में भारत में सामग्री (कंटेंट) में 84,576 करोड़ रुपये (10 अरब डॉलर) का निवेश किया है। उन्होंने कहा, इंडस्ट्री को 2-3 बड़े कारकों पर ध्यान देने की जरूरत है। इसमें अधिक सामग्री तैयार करना भी शामिल है, जो भारतीय जरूरतों के अनुरूप हो। वित्त वर्ष 2024 में दो कंपनियों ने अकेले सामग्री पर 25,000 करोड़ रुपये खर्च किए। वित्त वर्ष 2025 में यह 30,000 करोड़ हो गया और वित्त वर्ष 26 के लिए यह आंकड़ा 33,000 करोड़ से अधिक होगा। घरेलू स्क्रीन मनोरंजन या वीडियो मनोरंजन उद्योग अभी 2,53,729 करोड़ रुपये (30 अरब डॉलर) का है। अमेरिका में यह करीब 200 अरब डॉलर व चीन में 75 अरब डॉलर है। उन्होंने कहा कि पिछले 30 वर्षों में जिस मूल्य, स्थान या दर से विकास हुआ है, अगले 15 वर्षों में भी इसमें वृद्धि जारी रहेगी।
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नेटफ्लिक्स ने भारत में 20,000 नौकरियां दीं : सारंडोस
नेटफ्लिक्स के सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी टेड सारंडोस ने वेव्स में कहा कि कोविड के बाद 2021 से 2024 तक हमने भारत में इस तरह से निवेश किया जिससे हमारे प्रोडक्शन से 16,915 करोड़ (2 अरब डॉलर) का आर्थिक प्रभाव पैदा हुआ। साथ ही भारत में हमारे प्रोडक्शन से 20,000 से अधिक कलाकारों और क्रू सदस्यों को नौकरियां भी मिलीं। उन्होंने कहा, पिछले वर्ष वैश्विक स्तर पर तीन अरब घंटे भारतीय कंटेंट देखा गया तथा हर सप्ताह वैश्विक शीर्ष 10 में कम से कम एक भारतीय सामग्री शामिल रही। इन प्रोडक्शनों में 150 मौलिक फिल्में व शृंखलाएं शामिल हैं, जिन्हें भारत के 100 विभिन्न कस्बों और शहरों में फिल्माया गया है। सारंडोस ‘स्ट्रीमिंग द न्यू इंडिया: कल्चर, कनेक्टिविटी एंड क्रिएटिव कैपिटल’ सत्र में बोल रहे थे। इसका संचालन अभिनेता सैफ अली खान ने किया।
वैश्विक गेमिंग पावरहाउस के रूप में उभरा भारत
वेव्स भारत के मीडिया और मनोरंजन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है, जो वैश्विक गेमिंग उद्योग का नेतृत्व करने की देश की महत्वाकांक्षा को उजागर करता है। इसमें भारतीय डिजिटल मनोरंजन की परिवर्तनकारी क्षमता का पता लगाने के लिए रचनाकारों, इंडस्ट्री के लोगों, स्टार्टअप्स और नीति निर्माताओं को एक साथ लाया गया। साथ ही इसमें गेमिंग नवाचार पर विशेष ध्यान दिया गया। शिखर सम्मेलन की एक प्रमुख विशेषता ‘क्रिएट इन इंडिया चैलेंज’ थी। इसे भारत सरकार की ओर से युवा गेम डेवलपर्स को मौलिक, सांस्कृतिक रूप से निहित गेम डिजाइन करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया गया था। इस पहल ने भारतीय डेवलपर्स की एक नई पीढ़ी को प्रेरित किया है, जिनमें से कई आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आते हैं।
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