महाराष्ट्र में एक बार फिर मराठा आरक्षण की मांग बढ़ गई है। इस बीच महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने राज्य सरकार से मांग के संबंध में उठाए गए कदमों की सूची मांगी है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि दिन में नांदेड़ जिले में एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चव्हाण ने कहा कि रविवार सुबह नांदेड़ जिले में शुभम पवार नाम के युवक ने आत्महत्या कर ली। मैं राज्य सरकार से मांग करता हूं कि वह अपनी निर्णय लेने की प्रक्रिया में थोड़ी तेजी लाएं और मराठा समुदाय का समाधान करें। राज्य सरकार ने मराठा आरक्षण जारी करने के संबंध में अभी तक अपने फैसलों का कोई खुलासा नहीं किया। मराठा आंदोलन के प्रमुख और सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जारंगे ने आरक्षण के लिए राज्य सरकार को 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया था, जो इस मंगलवार को खत्म हो जाएगा।
अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने की चेतावनी
जरांगे ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं तो 25 अक्तूबर से दोबारा अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया जाएगा। वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कहना है कि हमारी सरकार मराठा समुदाय के लोगों को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे आत्महत्या न करें।
मराठा आरक्षण का मुद्दा क्या है?
महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग बहुत पुरानी है। साल 1997 में मराठा संघ और मराठा सेवा संघ ने सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के लिए पहला बड़ा मराठा आंदोलन किया। प्रदर्शनकारियों ने अक्सर कहा है कि मराठा उच्च जाति के नहीं बल्कि मूल रूप से कुनबी यानी कृषि समुदाय से जुड़े थे।
मौजूदा स्थिति की बात करें तो मराठा समुदाय महाराष्ट्र की आबादी का लगभग 31 प्रतिशत है। लेकिन फिर भी समरूप यानी एक समान नहीं है। 2018 में महाराष्ट्र विधानमंडल से मराठा समुदाय के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 16% आरक्षण का प्रस्ताव वाला एक विधेयक पारित किया गया। विधेयक में मराठा समुदाय को सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग घोषित किया। विधानमंडल में पारित होने के बाद मराठा आरक्षण का मामला अदालती हो गया। जून 2019 में बम्बई उच्च न्यायालय ने मराठा आरक्षण की संवैधानिकता को बरकरार रखा, लेकिन सरकार से इसे राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश के अनुसार 16% से घटाकर 12 से 13% करने को कहा। इस आरक्षण को बड़ा झटका तब लगा जब मई 2021 को जब सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को असंवैधानिक ठहराया और कानून को रद्द कर दिया।