लोकसभा में गुरुवार को तीन तलाक बिल पर जोरदार बहस हुई। इस दौरान तकरीबन समूचे विपक्ष ने बिल का विरोध करते हुए इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग की। एमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी बहस में हिस्सा लिया और सरकार पर तीखा हमला बोला।
ओवैसी ने कहा- सरकार ने इस बिल पर किसी भी पक्ष से बात नहीं की है। जो लोग विरोध कर रहे हैं उनकी तो छोड़िए, जिनके लिए बिल लाया जा रहा है उनसे तक बात नहीं की गई है।
उन्होंने कहा, आपने (सरकार) समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया और तीन तलाक को आपराधिक करार दे दिया है। क्योंकि यह हमारे खिलाफ इस्तेमाल होगा। लैंगिक अल्पसंख्यकों को धारा 377 में अपनी पसंद की छूट दी गई, तब धार्मिक अल्पसंख्यकों को क्यों नहीं?
ओवैसी ने कहा, अगर आपकी आस्था आपकी आस्था है, त मेरी आस्था भी मेरी आस्था होनी चाहिए। आपका (सरकार) इरादा सही नहीं है। आप अपना कानून ला सकते हैं लेकिन हम अपने धर्म को जब्त नहीं होने देंगे।
लोकसभा में बिल पास
मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को रोकने के मकसद से लाया गया ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2018’ लोकसभा में पास हो गया। हालांकि, इसके कुछ प्रावधानों का विरोध करते हुए कांग्रेस ने इसे संयुक्त प्रवर समिति में भेजने की मांग की तो सत्तारूढ़ भाजपा ने इसे मुस्लिम महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उठाया गया ऐतिहासिक कदम करार दिया। संशोधनों पर वोटिंग से पहले कांग्रेस और एआईएडीएमके ने सदन से वॉकआउट किया। इसके बाद सदन में वोटिंग हुई।