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Owaisi: 'बाबरी जैसी गलती दोहराई', भोजशाला फैसले पर ओवैसी का हमला; कहा- संविधान की मूल भावना की अनदेखी हुई

Fri, 15 May 2026 09:50 PM IST
शिवम गर्ग एएनआई, हैदराबाद

सार

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भोजशाला मामले के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अदालत ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट और वक्फ रिकॉर्ड की अनदेखी की है। पढ़ें पूरी खबर।
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असदुद्दीन ओवैसी, एआईएमआईएम प्रमुख - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ( एआईएमआईएम ) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भोजशाला मामले में आए फैसले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह फैसला संविधान की मूल भावना और धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

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हैदराबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए ओवैसी ने आरोप लगाया कि अदालत ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट और पुराने दस्तावेजों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला भविष्य में कई नए धार्मिक विवादों का रास्ता खोल सकता है।

'प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट का मजाक बना दिया गया'
ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद-राम मंदिर फैसले में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर से जोड़ा था, लेकिन अब उसी सिद्धांत को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा "आज जो फैसला आया है, उसने सेज ऑफ वर्शिप एक्ट को मजाक बनाकर रख दिया है। अगर इस तरह फैसले आते रहे तो कल कोई भी किसी भी धार्मिक स्थल पर दावा कर सकता है।"
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बाबरी मस्जिद फैसले से की तुलना
ओवैसी ने भोजशाला मामले की तुलना बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद से करते हुए कहा कि उस समय भी उन्होंने फैसले पर सवाल उठाए थे। उनके मुताबिक, बाबरी फैसले में अदालत ने कहा था कि मुस्लिम पक्ष के पास कब्जा नहीं था, लेकिन भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष का कब्जा लंबे समय तक बना हुआ था। उन्होंने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि बाबरी फैसले के बाद ऐसे कई मामले सामने आएंगे। उस समय लोगों ने मुझे चुप रहने को कहा था, लेकिन आज वही स्थिति सामने आ रही है।

वक्फ रिकॉर्ड और पुराने दस्तावेजों का हवाला
ओवैसी ने दावा किया कि अदालत ने 1935 के धार स्टेट गजट और 1985 के वक्फ पंजीकरण को नजरअंदाज किया है। उन्होंने कहा कि शीर्षक विवाद (Title Dispute) से जुड़ा सिविल मामला अभी भी लंबित है, इसके बावजूद इस तरह का फैसला दिया गया।

क्या है भोजशाला विवाद?
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। हिंदू पक्ष के वकील के अनुसार कोर्ट ने भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना है। यह फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, जिस पर अदालत ने भरोसा जताया है।

भोजशाला विवाद का नया कानूनी दौर 2022 में शुरू हुआ, जब हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। इसके बाद मार्च 2024 में एएसआई सर्वे का आदेश हुआ और 98 दिन तक जांच चली। जुलाई 2024 में रिपोर्ट पेश की गई। अप्रैल 2026 से नियमित सुनवाई शुरू हुई, जिसमें हिंदू, मुस्लिम और जैन पक्षों ने अपने दावे रखे। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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