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Asad Ahmad encounter: नोएडा, दिल्ली, झांसी और अजमेर में हैं अतीक के बड़े ठिकाने! अब यहां होगी बड़ी कार्रवाई

सार

Asad Ahmad encounter: उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी रहे विक्रम सिंह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को सजग हो जाना चाहिए। उनका कहना है कि जो लोग अपराध को विरासत में लेकर आगे बढ़ा रहे हैं उन्हें या तो कोर्ट में जाकर सरेंडर कर देना चाहिए या फिर पुलिस थाने में जाकर अपराध से तौबा करनी चाहिए...
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Asad Ahmad encounter: Atiq Ahmad with his brother Ashraf Ahmad - फोटो : Agency
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विस्तार
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अतीक अहमद के बेटे असद के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद अब नोएडा, दिल्ली और झांसी समेत अजमेर के उन मददगारों पर शिकंजा कसने की तैयारी है, जो बीते कुछ समय से असद को संरक्षण दे रहे थे। इस पूरे मामले में जांच कर रही एजेंसी के पास ऐसी पुख्ता जानकारियां हैं कि जिन लोगों ने असद को इन शहरों में संरक्षण दिया, वे सब अतीक के न सिर्फ गुर्गे हैं, बल्कि उसके इशारे पर दहशत भी पैदा करते थे। मुठभेड़ से पहले करीब 48 दिनों तक असद और गुलाम मुस्लिम अतीक के गुर्गों के साथ लगातार इन्हीं शहरों में अपना ठिकाना बनाए हुए थे।

अतीक के लिए करते थे उगाही

जानकारी के मुताबिक असद ने प्रयागराज में उमेश पाल की हत्या के बाद शहर छोड़ दिया था। प्रयागराज के बाद वह कानपुर, नोएडा और दिल्ली गया था। इसी दौरान असद राजस्थान के अजमेर शहर भी गया। एसटीएफ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि असद की इन शहरों में जिन लोगों से मुलाकात हुई और जो लोग असद के साथ बने हुए थे अब उन सभी को ट्रैक किया जा रहा है। कुछ लोग तो असद के साथ प्रयागराज से लेकर अजमेर तक लगातार साथ बने रहे। अब जल्द ही उन सभी लोगों पर भी कार्रवाईयां होंगी, जिन लोगों ने असद को आश्रय दिया हुआ था। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली और नोएडा में जिन लोगों ने असद को शरण दी थी, वह प्रयागराज और कानपुर में अतीक के नाम पर पहले न सिर्फ धन की उगाही करते थे, बल्कि कई मामलों में अपहरण जैसे संगीन मामलों में वांछित भी रहे हैं।

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सूत्रों के मुताबिक अतीक अहमद के बेटे असद की लोकेशन दिल्ली के जिस इलाके में मिली थी, उस इलाके में अतीक के कुछ दूरदराज के रिश्तेदार भी रहते हैं। इस पूरे मामले में कार्रवाई कर रही एजेंसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि असद को दिल्ली के सिर्फ उसी इलाके ही नहीं, बल्कि नोएडा के भी कुछ इलाकों में ले जाने और उसे शरण दिलाने वाले लोग अतीक अहमद के लिए लंबे समय से काम कर रहे थे। हालांकि जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्र बताते हैं कि माफियाओं पर कसे जा रहे शिकंजे के चलते यह सभी लोग अंडरग्राउंड थे। लेकिन असद को बचाने के लिए अतीक के गुर्गे उसे इन शहरों में प्रश्रय दे रहे थे। असद को ढूंढने की कार्रवाई के दौरान इन लोगों को न सिर्फ पहचाना गया, बल्कि कई जगह पर दबिश भी दी गईं।

असद ने कानून व्यवस्था को दी थी चुनौती

अतीक अहमद के बेटे असद और उसके शार्प शूटर गुलाम मुस्लिम ने जब प्रयागराज की सड़क पर खुलेआम हथियार लहरा कर बम फेंककर वकील उमेश पाल की हत्या की, तो सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में यह खौफनाक मंजर देखा गया। इस पूरे मामले में जांच कर रही एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक असद जिन जगहों पर छुपने के लिए गया, उन सभी जगहों और उनसे मिलने वालों की पूरी डिटेल अब उनके पास आ चुकी है। यह वे लोग हैं जो न सिर्फ इस घटना के बाद असद से सीधे तौर पर जुड़े रहे, बल्कि उसके इशारे पर अतीक के पूरे नेटवर्क को उत्तर प्रदेश से लेकर दूसरे राज्यों में भी सक्रिय रखते हैं।

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इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी रहे विक्रम सिंह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को सजग हो जाना चाहिए। उनका कहना है कि जो लोग अपराध को विरासत में लेकर आगे बढ़ा रहे हैं उन्हें या तो कोर्ट में जाकर सरेंडर कर देना चाहिए या फिर पुलिस थाने में जाकर अपराध से तौबा करनी चाहिए। उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी एसएन चौबे कहते हैं कि अतीक अहमद के बेटे असद ने जिस तरीके से प्रयागराज में बमबारी और तमंचा लहरा कर एक वकील की हत्या की। वह कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती देना ही था। उनका मानना है कि कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। इसके अलावा जो लोग अतीक और असद को सपोर्ट कर रहे हैं, चाहे वह उतर प्रदेश के हों, या उत्तर प्रदेश के बाहर के हों, पुलिस ऐसे लोगों को पहचान करे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें।

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