अपने दौरे पर भारत और चीन के बीच लगातार तेज होते विवाद के बीच तिब्बती आध्यात्मिक धर्मगुरु दलाई लामा शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा पर बसे तवांग पहुंच गए। उनके साथ मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी हैं। दलाईलामा को बीते चार अप्रैल को गुवाहाटी से हेलीकाप्टर से यहां पहुंचना था। लेकिन मौसम खराब होने की वजह से उनको सड़क मार्ग से लगभग साढ़े पांच सौ किमी की दूरी तय कर यहां आना पड़ा।
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा दो दिनों तक दिरांग में थे और उससे पहले एक दिन बोमडिला में। बोमडिला ही वह जगह जहां से वर्ष 1962 की लड़ाई के बाद चीनी सैनिक पीछे हटे थे। दिरांग से यहां तक की 140 किमी दूरी तय करने में पांच घंटे से ज्यादा समय लग गया। लगभग आठ साल बाद यहां पहुंचे तिब्बती धर्मगुरु के आगमन पर पूरे इलाके को रंग-बिरंगे झंडों और फूलों से सजाया गया है।
तवांग के उपायुक्त सांग फुंट्सो ने बताया कि शनिवार से यहां दलाई लामा के कार्यक्रम शुरू होंगे। उन्होंने कहा कि तवांग मठ में चार दिन बिताने के बाद वे 11 अप्रैल को लौट जाएंगे। उनके दौरे को ध्यान में रखते हुए देश के सबसे बड़े तवांग मठ और उसके आस-पास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है। 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह बौद्ध मठ तिब्बत की राजधानी ल्हासा स्थित पोटाला पैलेस के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मठ है।