एरिंग ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि चीन की ओर से इस अप्रत्याशित, दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन जानबूझकर की गई घटना ने अरुणाचल प्रदेश के लोगों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है।
चीन द्वारा अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाने पर अरुणाचल प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस विधायक निनॉन्ग एरिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। कांग्रेस विधायक निनॉन्ग एरिंग ने पीएम मोदी से अनुरोध किया है कि वह चीन द्वारा अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाने का मुद्दा अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उठाएं। अरुणाचल प्रदेश विधानसभा में पासीघाट पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले एरिंग ने दावा किया कि चीन ने पहले भी इन क्षेत्रों पर अपना दावा किया है।
विज्ञापन
एरिंग ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा, चीन की ओर से इस अप्रत्याशित, दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन जानबूझकर की गई घटना ने अरुणाचल प्रदेश के लोगों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। यह सामान्य जानकारी है कि चीन ने पहले भी अप्रैल 2023 में 11 स्थानों, 2021 में 15 स्थानों और 2017 में छह स्थानों का नाम बदलकर अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा जताने की कोशिश की थी।
चीन ने सोमवार (28 अगस्त) को आधिकारिक तौर पर अपने "मानक मानचित्र" का 2023 संस्करण जारी किया था, जिसमें दावा किया गया कि अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन उस देश के हैं।
विज्ञापन
एरिंग ने पत्र में कहा, अरुणाचल प्रदेश की पासीघाट पश्चिम सीट का एक निर्वाचित प्रतिनिधि होने के नाते मैं आपसे आगामी जी-20 शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ चीन द्वारा अपने मानचित्र में एकतरफा बदलाव करने के इस मामले पर चर्चा करने का आग्रह करता हूं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि जिनपिंग आठ से 10 सितंबर तक होने वाले शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे या नहीं। इस बारे में चीन और भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से कोई बयान जारी नहीं किया गया है।
भारत ने मंगलवार को चीन के तथाकथित "मानक मानचित्र" में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन पर दावा करने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और कहा कि इस तरह के कदम केवल सीमा से संबंधित समाधान को जटिल बनाते हैं। विदेश मंत्रालय ने भी इस दावे को "कोई आधार नहीं" बताते हुए खारिज कर दिया। चीन ने बुधवार को अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह उसके कानून के अनुसार एक "नियमित अभ्यास" है। साथ ही चीन ने भारत से इस विषय पर निष्पक्ष एवं शांत रहने और मुद्दे की अतिव्याख्या करने से बचने का आग्रह किया।