वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मांग को खारिज करते हुए सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी राजनयिकों से मुलाकात कर पूर्व प्रधानमंत्री ने देशहित को नजरअंदाज किया है।
उन्हें ऐसी मुलाकात के तथ्य, प्रयोजन और अनिवार्यता के बारे में खुलासा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री बताएं कि बैठक में क्या बातें हुईं और जिन लोगों ने देशहित को नजरअंदाज कर बात की और आतंकियों से हाथ मिलाया, उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।
वित्त मंत्री ने मणिशंकर अय्यर द्वारा पाकिस्तानी राजनयिकों के लिए आयोजित डिनर पार्टी को ‘राजनीतिक आपदा’ करार देते हुए सिंह और कांग्रेस से मांग की कि वे इसके प्रयोजन का खुलासा करें। इसकी बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल यदि राष्ट्रीय नीति में विश्वास करता है तो उसे समझना होगा कि आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।
उन्होंने सवाल किया, ‘क्या विपक्षी पार्टी राष्ट्र का हिस्सा नहीं है? यदि कोई राष्ट्रीय हित की उपेक्षा करता है तो उसे इस सवाल का भी जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए। मनमोहन की ओर से प्रधानमंत्री मोदी से माफी की मांग करने के कुछ ही घंटे बाद वित्त मंत्री संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे।
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पाक राजनयिकों और पूर्व विदेश मंत्री के साथ कांग्रेस नेताओं की बैठक को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए जेटली ने कहा कि आतंकवाद से लड़ने में मोदी सरकार के रिकॉर्ड की कोई बराबरी नहीं कर सकता है। यूपीए की सरकार के दौरान आतंकवाद के बावजूद पाकिस्तान से वार्ता होती रही जबकि हमारी राष्ट्रीय नीति है कि जब तक सीमा पार से आतंक का निर्यात होता रहेगा, पड़ोसी देश के साथ कोई बातचीत नहीं होगी।