फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

62 के युद्ध का वो साल दूसरा था, 2017 का ये साल दूसरा हैः जेटली

Fri, 30 Jun 2017 03:57 PM IST
amarujala.com- Presented By- अभिषेक तिवारी
विज्ञापन
विज्ञापन
रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने चीन के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि 1962 युद्ध में भारत की बात कुछ और थी, 2017 का भारत उस समय से अलग है। बता दें कि इससे पहले चीन के सरकारी मीडिया ने गुरुवार को कहा था कि भारत को साल 1962 के युद्ध को याद रखना चाहिए। उन्होंने चीन को चेताते हुए बिल्कुल साफ शब्दों में कहा है कि 1962 के भारत और 2017 के भारत में जमीन और आसमान का अंतर है। 
विज्ञापन


जेटली ने एक कार्यक्रम में दिए बयान में कहा कि चीन को याद रखना चाहिए की 1962 में भारत की स्थित कुछ और थी, लेकिन 2017 में भारत की अलग स्थिति है। गौरतलब है कि चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने बयान जारी करते हुए गुरुवार को कहा था कि चुंबा घाटी को लेकर भारत सरकार से अभी कोई बातचीत नहीं चल रही है। भारत से बातचीत करने के लिए चीन की एकमात्र शर्त है कि भारतीय सेना अपनी जगह से पीछे जाए, तभी कोई बातचीत होगी। चीनी विदेश मंत्रालय का ये बयान चीन के अड़ियल रवैये की बानगी भर है। 

यही नहीं, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने ये भी कहा कि भारत को साल 1962 को भी नहीं भूलना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय ही नहीं, चीनी अखबार भी भारत के बारे में धमकी भरे लेख लिख रहे हैं। चीनी न्यूज पोर्टल ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत पर 1962 के युद्ध में मिली हार का असर है।लेख में भारतीय मीडिया पर भी हमला करते हुए लिखा है कि वो एक ऐसा माहौल पैदा कर रही है जिससे ये साबित हो रहा है कि चीनी सैनिक उसके क्षेत्र में जबरन घुस रहे हैं। इतना ही नहीं, चीनी मीडिया सिक्किम बॉर्डर के मुद्दे को भी 1962 की जंग के दौरान अमेरिकी समर्थन से जोड़ते हुए देख रहा है।  ्र
विज्ञापन


ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि सिक्किम एक आजाद देश था लेकिन भारत के साथ वह 1975 में जुड़ा। सिक्किम बॉर्डर को लेकर चीन-सिक्किम के बीच पहले ही बात बन चुकी थी और 2006 में नाथू ला दर्रा को लेकर भी फैसला किया जा चुका था। लेकिन भारत इसको लेकर आपत्ति जता रहा है।  

बुधवार को चीनी सरकार ने कहा कि दोंगलांग क्षेत्र भारत और भूटान के हिस्से में नहीं आता है। इसके साथ ही लेख में भारत को इस मामले में हस्तक्षेप करने को लेकर थर्ड पार्टी बताया है। भूटान ने औपचारिक तौर पर उसके क्षेत्र में सड़क बनाने पर विरोध किया है। चीनी मीडिया भूटान के कारकों को लेकर बोल रहा है ना कि भारत के सीमा पार करने और सड़क बनाने पर रोक को लेकर। 

चीनी मीडिया ने भारत को 1960 के दशक का उदाहरण दिया है। वहां के अखबार हॉकिश ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, '1950 के अंत से 1960 की शुरुआत तक, सोवियत संघ और अमेरिका दोनों ने चीन के खिलाफ 'भारत कार्ड' खेलने का प्रयास किया। उस वक्त सरकार ने भारत की नीतियों का समर्थन किया था, लेकिन परिणाम वैसे नहीं आए जैसी उम्मीद थी।' लेख में 1962 में चीन और भारत के बीच हुए युद्ध में भारत की हार का जिक्र भी किया गया है। 

साथ ही लिखा है कि इतिहास गवाह है, कि भारत, चीन का सामना नहीं कर सकता है। चीन की नीतियों पर अपनी चिंताओं के बजाय भारत को हमारे साथ संबंध मजबूत करने चाहिए, यह उसकी सुरक्षा और विकास दोनों के लिए आवश्यक है। अखबार ने यह भी लिखा कि अमेरिका, भारत का इस्तेमाल चीन के खिलाफ एक हथियार के रूप में कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें