इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरने वालों पर सरकार सख्ती से पेश आ सकती है। एक निजी चैनल से बात करते हुए वित्त
मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जो लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं उनसे सख्ती से निपटा जाएगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि आम बजट में घोषित किए गए स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ सिर्फ वही लोग उठा पाएंगे जो इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं। वित्त मंत्री ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि वेतनभोगी वर्ग देश का सबसे ईमानदार करदाता है। उसके पास कटौती की कोई गुंजाइश नहीं होती। इसलिए इस वर्ग को 40 हजार रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन देने का एलान किया गया।
उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरने वालों के खिलाफ आने वाले समय में शिकंजा कसा जाएगा। इसके लिए टैक्स कानून में बदलाव किया जाएगा। इसके तहत टैक्स रिटर्न नहीं भरने वालों को टैक्स में छूट का लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने साफ किया कि अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरते हैं तो सरकार की तरफ से लागू स्टैंडर्ड डिडक्शन छूट का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार यह नया कानून इसी साल एक अप्रैल से लागू करने जा रही है।
भावी पीढ़ियों पर कर्ज नहीं लाद सकते
जेटली ने कहा कि हमेशा हम कर्ज लेकर देश चलाएंगे तो आने वाली पीढ़ियों पर कर्ज छोड़ जाएंगे। हमारी सरकार यह नहीं करना चाहती। मध्य वर्ग को इस बार राहत न मिलने पर उन्होंने कहा कि हर बजट में इस वर्ग को कुछ न कुछ छूट दी गई। पहले बजट में टैक्स सीमा ढाई लाख की। हाउसिंग लोन, ट्रांसपोर्ट अलाउंस, ईटीसी की सीमा को बढ़ाया।
गरीबों के लिए देगा होगा योगदान
अरुण जेटली
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शिक्षा और स्वास्थ्य पर एक प्रतिशत सेस बढ़ाने पर वित्त मंत्री ने कहा कि देश में अगर गरीबी दूर करनी है तो उसमें वेतनभोगी वर्ग को भी थोड़ा बहुत योगदान करना पड़ेगा। अगर गरीबों को स्वास्थ्य सुविधा देनी है तो क्या यह वर्ग इसमें योगदान नहीं करेगा? गरीबों के हित में मदद करना अहसान नहीं हमारी जिम्मेदारी है।
किसान की आय बढ़ाना लक्ष्य
जेटली ने कहा कि खरीफ की फसल की बुवाई से पहले डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य का एलान कर दिया जाएगा। अगर देश में गरीबी और असमानता को दूर करना है तो इसकी शुरुआत किसान से करनी होगी। किसान की आय बढ़ाने के लिए सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से बाजार को नुकसान नहीं
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बजट के बाद शेयर मार्केट में आई गिरावट पर उन्होंने कहा कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में पिछले वर्ष की आमदनी 3.67 लाख करोड़ रुपये थी। इसमें एक लाख रुपये तक कमाने वालों को छूट थी। ये समाज के अमीरों लोगों के लिए टैक्स छूट थी। हमने 10 फीसदी की रियायती दर रखी। बाजार की ताकत अर्थव्यवस्था की ताकत के रूप में निर्भर होती है।
टैक्स रिटर्न फाइल न करना कंपनियों को पड़ेगा भारी
कालेधन के खिलाफ अभियान के तहत इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। वित्त बिल 2018-19 में कंपनियों के इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग नियम में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। यह नियम 1 अप्रैल से लागू होगा।
सेस से जुटाएंगे बीमा योजना के लिए फंड : नीति आयोग
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नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटन को बढ़ाकर 6000 करोड़ किया गया है। इसके अलावा 2,000 करोड़ रुपये की मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना चल रही है। सरकार ने स्वास्थ्य शिक्षा परियोजनाओं की पूंजी निवेश जरूरतों को पूरा करने के लिए एक वैकल्पिक हाई एजूकेशन फंडिंग एजेंसी (एचईएफए) प्रणाली स्थापित कर स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए वित्तीय गुंजाइश उपलब्ध कराई है। साथ ही 1 फीसदी अतिरिक्त सेस के प्रस्ताव से सालाना 11,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। इन सभी को मिलाकर गरीबों के स्वास्थ्य बीमा योजना की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध होगी।