केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो)
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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर लगाए गए यौन हिंसा के आरोप को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मुख्य न्यायाधीश पर आरोप लगाया गया है, इससे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट की गरिमा गिराने की कोशिश की जा रही है और इस समय में न्यायपालिका के साथ खड़े होने की जरुरत है।
इस घटनाक्रम के लिए वामपंथी विचारधारा के दोषी होने का संकेत देते हुए वित्त मंत्री ने रविवार को एक ब्लॉग के माध्यम से हमला बोला। उन्होंने कहा कि वामपंथी ताकतें पूरे देश से नकार दी गई हैं। मीडिया की मुख्य धारा से भी उन्हें हटा दिया गया है। लेकिन अब वे डिजिटल मीडिया और वेब मीडिया में रहकर अपना 'खेल' खेल रही हैं। उन्होंने कहा कि वामपंथी लोग व्यवस्था के अंदर रहकर व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के सिद्धांत पर चलते हैं और मुख्य न्यायाधीश पर यह हमला इसी सोच के तहत किया गया है।
जेटली के मुताबिक, जिस तरह एक कर्मचारी ने अपने ऊपर यौन शोषण का आरोप लगाया है, और आरोप लगाने के बाद उसकी कॉपी 22 जजों को दी है, वह संदेहास्पद है। इस मामले का सबसे ज्यादा सनसनीखेज पहलू यह है कि आरोप लगाने वाले पत्र को चार वेब मीडिया के संस्थानों को भेजा गया है।
इसी से यह जाहिर होता है कि इस मामले को कुछ लोग सनसनी बनाना चाहते थे। जेटली ने कहा कि जज हमेशा इज्जत के लिए काम करते हैं, इसलिए हमें इस समय में उनके साथ खड़े होकर उनकी और न्यायपालिका की साख और मर्यादा बरकरार रखने में मदद करनी चाहिए।