केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि कर विभाग सहित विभिन्न मशीनरियां मिलकर प्रयास करें तो विश्व बैंक के व्यापार सुगमता सूचकांक (बिजनेस इंडेक्स) में भारत की रैंकिंग में सुधार संभव है। भारत बिजनेस सूचकांक में शीर्ष-50 में आसानी से जगह बना सकता है।
'कर विभाग सहित विभिन्न मशीनरियां मिलकर प्रयास करें तो यह संभव'
अंतरराष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस पर एक कार्यक्रम में जेटली ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की वार्ताओं में व्यापार सुगमता के अलावा ज्यादातर क्षेत्रों में प्रगति नहीं हुई है। यही कारण है कि इस बारे में अंतरराष्ट्रीय समझौते के बिना भी, यह हमारी घरेलू अर्थव्यवस्था के व्यापक फायदे व हित में है कि व्यापार सुगमीकरण हो। हालांकि उन्होंने व्यापार सुगमता सूचकांक में भारत की सफलता का भी जिक्र किया। जेटली ने कहा कि बीते तीन साल में भारत 142वें स्थान से बढ़कर 100वें स्थान पर आ गया है और एक ही साल में उसने 30 पायदान की छलांग लगाई है।
उन्होंने कहा कि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमारे लिए एक लक्ष्य तय किया है कि हमें टॉप-50 में आने की कोशिश करनी होगी और इसमें आना होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि विश्व बैंक जिन दस मानकों की कसौटी रखता है। उनमें से तीन सुधार वास्तव में जरूरी है। इनमें से एक तो जमीन और भवनों की स्थानीय निकाय मंजूरी से जुड़ी है। दूसरी सीमापार व्यापार और तीसरी अनुबंध कार्यान्वयन है। इन मानकों पर सुधार ज्यादा मुश्किल नहीं है।
जीएसटी दर फिर घटाने का संकेत
वित्त मंत्री ने कहा है कि दूसरे देशों की तुलना में भारत में जीएसटी बेहद कम समय में स्थापित हो गया है। इसलिए हमारे पास अवसर है कि भविष्य में इसकी दरों को फिर से युक्तिसंगत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जीएसटी ने देश में अप्रत्यक्ष कर के पूरे सिस्टम को बदल दिया है।
अभी जीएसटी की चार दरें पांच फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी हैं। जीएसटी काउंसिल ने नवंबर में फैसला लिया था कि सिर्फ छह सामानों को 28 फीसदी स्लैब में रखा जाएगा। इसके बाद 178 वस्तुओं को उच्च टैक्स दर से 18 फीसदी टैक्स के दायरे में पहुंचा दिया गया था। वहीं 13 सामानों का टैक्स 18 फीसदी से घटाकर 12 प्रतिशत और आठ सामानों का टैक्स 12 से कम कर पांच फीसदी कर दिया गया था।