8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में नोटबंदी लागू की थी। जिसमें 500 और 1000 रुपये के नोट को बंद कर दिया गया था। मोदी सरकार के इस फैसले को आज दो साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधा और कहा कि अर्थव्यवस्था की 'तबाही' वाले इस कदम का असर अब स्पष्ट हो चुका है और इससे देश का हर व्यक्ति प्रभावित हुआ।
मनमोहन सिंह की इस टिप्पणी पर पलटवार करते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली का कहना है कि इसके जरिए सरकार ने देश के बाहर जमा हुए काले धन को निशाना बनाया। न्होंने कहा कि नोटबंदी से औपचारिक अर्थव्यवस्था का विस्तार हुआ और कर आधार भी बढ़ा। इससे सरकार के पास गरीबों के हित में काम करने और बुनियादी ढांचे का विकास करने के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हुए।
वित्तमंत्री ने कहा, 'नोटबंदी भारत सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय था। सरकार ने इसके जरिए देश से बाहर मौजूद कालेधन को निशाना बनाया। संपत्ति धारकों से कहा गया कि वह दंड का भुगतान करके उस पैसे को वापस लेकर आएं। इस सरकार के पांच साल पूरे होने तक, हम करदाताओं की संख्या को दोगुना कर चुके होंगे।'
उन्होंने कहा कि नवंबर 2016 में उस समय चलने वाले 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने का परिणाम यह हुआ कि ‘हमारी अर्थव्यवस्था अधिक औपचारिक हुई, अधिक राजस्व मिला, गरीबों के लिए अधिक संसाधन मिले, बुनियादी ढांचा बेहतर हुआ और हमारे नागरिकों का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है।’
जेटली ने कहा, 'जो लोग कालेधन को वापस लाने में असफल रहे उनपर काला धन अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है। उन सभी खातों और संपत्तियों की जानकारी सरकार के पास पहुंची और फिर उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई। नोटबंदी की वजह से लोगों को कैश बैंक में जमा करने पर मजबूर होना पड़ा। जमा किए गए नकद की विशालता और मालिक की पहचान किए जाने के परिणामस्वरूप 17.42 लाख खाता धारक संदिग्ध मिले। जिनसे बिना किसी सख्ती के ऑनलाइन माध्यम से प्रतिक्रिया प्राप्त हुईं।'
अरुण जेटली ने आगे कहा, 'उल्लंघन करने वालो को सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ा। बैंकों में जमा हुई बड़ी राशियों की वजह से बैंक की उधार देने की क्षमता में सुधार हुआ। इसमें से बहुत सी राशि को आगे के निवेश के लिए म्यूचुअल फंड्स में लगाया गया। यह औपचारिक प्रणाली का हिस्सा बन गया है। वित्त वर्ष 2018-19 में व्यक्तिगत आयकर पिछले साल की तुलना में 20.2 प्रतिशत ज्यादा रहा। वहीं कॉर्पोरेट कर संग्रह 19.5 प्रतिशत ज्यादा रहा। नोटबंदी से दो साल पहले प्रत्यक्ष कर संग्रह में क्रमशः 6.6 और 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।'