लोकसभा में बुधवार(22 मार्च) को चर्चा के दौरान वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भविष्य में आधार ही पहचान का एकमात्र कार्ड होगा। इससे ये अन्य पहचान पत्रों जैसे वोटर आईकार्ड, पैन कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों की जगह ले लेगा।
जेटली ने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान के लिए आधारकार्ड ही काफी होगा। इसके साथ ही जेटली ने इस बात की भी संभावना जताई की जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) के द्वारा कर-संग्रहण की स्थिति भी सुधरेगी।
इसके बाद बीजू जनता दल के भर्तृहरि महताब ने वित्त मंत्री से पूछा तो क्या आप इसके लिए नागरिकों को बाध्य करेंगे? इस पर जेटली ने कहा हां।
महताब ने आरोप लगाया कि पैन कार्ड की जगह पर आधार कार्ड को टैक्ट रिटर्न के लिए जरूरी बनाना सुप्रीम कोर्ट के 2015 के निर्णय के खिलाफ है। कोर्ट ने सरकार से कहा था कि लोगों के सामाजिक कल्याणकारी लाभ पाने के लिए आधार को अनिवार्य न करें।
इसके जवाब में जेटली ने कहा कि देश के 98 फीसदी नागरिकों के पास आधार कार्ड है। अगर कोई व्यक्ति टैक्स रिटर्न के साथ आधार संख्या प्रस्तुत करता है, तो यह स्पष्ट होगा कि यह नकली पैन नहीं है। इसका कारण यह है कि उसका बॉयोमीट्रिक आधार के साथ जुड़ा हुआ है।