वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को कहा कि बजट में वेतनभोगी वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों को 12 हजार करोड़ रुपये का फायदा दिया गया है। उन्होंने इक्विटी पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) लगाने को भी जायज ठहराते हुए कहा कि सरकार मुश्किलों से निपटना जानती है।
एलटीसीजी को जायज ठहराया, कहा- नोटबंदी व जीएसटी से अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ
वित्त मंत्री ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी से मध्यकालीन और दीर्घकालीन अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा और देश अगले वित्त वर्ष से विश्व की सबसे तेजी से उभरने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
बजट 2018-19 पर चर्चा का जवाब देते हुए जेटली ने कहा कि मई 2014 में एनडीए की सरकार बनने के बाद कई सारी चीजें बदली हैं। हमें जो चीजें विरासत में मिली थीं और जो चीजें हमने तैयार की हैं, वे बिल्कुल अलग हैं।
समझा जा रहा है कि भारत ने 0.1 फीसदी से पिछड़ते हुए सबसे तेजी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्था का दर्जा खो दिया है। इस बारे में जेटली ने कहा कि
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुताबिक भारत एक बार फिर यह दर्जा हासिल कर लेगा। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए जेटली ने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में कोई भारतीय अर्थव्यवस्था के उज्ज्वल भविष्य की बात नहीं करता था। ऐसा इसी सरकार में हुआ है। नोटबंदी के बाद कांग्रेस ने विकास दर में 2 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया था लेकिन यह महज 0.2 फीसदी गिरी है। इसके बाद ही व्यक्तिगत आयकर का आधार बढ़ा है और डिजिटलीकरण का विस्तार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि बजट में उन्होंने हर वर्ग का ख्याल रखने की कोशिश की है और मध्यवर्ग तथा वरिष्ठ नागरिकों को भी राहत दी है। वेतनभोगी वर्ग को दी गई राहत का कुल खर्च 8 हजार करोड़ रुपये है वहीं पेंशनभोगी और वरिष्ठ नागरिकों को फायदा देने से सरकारी खजाने पर 4000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। चुनौती के इस दौर में भी 12 हजार करोड़ रुपये की राहत देना जरूरी था और मैंने पिछले चार बजट से यह परंपरा बरकरार रखी है।