वीएस गायतोंडे द्वारा साल 1982 में बनाई गई एक बेनाम कलाकृति किसी भी भारतीय कलाकार की अब तक की पांच सबसे महंगी कलाकृतियों में शुमार हो गई है। सैफ्रनआर्ट की ओर से मॉडर्न इंडियन आर्ट पर लगी लाइव बिक्री में गायतोंडे की कलाकृति की 26.9 करोड़ रुपये बोली लगी।
कलाकार की सटीकता और सटीक, स्वतंत्र कला तकनीक को प्रदर्शित करती इस हरी ऑयल पेंटिंग (तेलचित्र) की कीत 20 से 30 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई थी। यह पेंटिंग गायतोंडे की भारत में तीन सबसे मंहगी कलाकृतियों में भी शामिल हो गई है।
वहीं, भूपेन कुमार की पेंटिंग 'ट्रेड्समैन' (व्यापारी) 3.72 करोड़ रुपये में बिकी और नीलामी की दूसरी सबसे महंगी पेंटिंग बनी। यह पेंटिंग साल 1986 में बनाई गई थी। साल 1958 में बनी राम कुमार की पेंटिंग 'कंपोजीशन' (रचना) दो करोड़ रुपये में बिकी।
शीर्ष पांच कलाकृतियों में से 1940 के दशक में केएच आरा बनाई कई एक शीर्षकहीन पेंटिंग भी रही। मजदूरों के समूह को ताश खेलते हुए चित्रित कर रही यह कलाकृति अपने आधार मूल्य से चार गुना अधिक कीमत पर 1.2 करोड़ रुपये में खरीदी गई। साल 2007 में एसएच रजा द्वारा बनाई गई एक ज्यामितीय कलाकृति 'ओम' भी अपने आधार मूल्य से दोगुनी कीमत पर 1.92 करोड़ रुपये में बिकी।