आपके घर की छत थोड़ी सी टपकने लगे तो आपको रात को नींद नहीं आती। लेकिन सोचिये कि अगर आपके घर में ऐसा शौचालय लगा हो जिसमें जाने के बाद आपको हरदम यह डर सताता रहे कि जाने कब बारिश हो जाए तो क्या कहेंगे? दरअसल, यह बारिश असली नहीं, लेकिन एक कलाकार की देन है जो आपको शौचालय में भी बारिश के जैसे मौसम का एहसास देगी।
बीकानेर के एक कलाकार राम भदाणी को यह लगता था कि शौचालय हर घर का एक अहम हिस्सा होता है। इसके बिना किसी का काम नहीं चलता। लेकिन लोग इसकी साफ-सफाई की तरफ पूरा ध्यान नहीं देते। इसी के बाद राम भदाणी ने शौचालय को खूबसूरत बनाने की सोची। बीकानेरी भित्ति कला उस्ता और बादल पेंटिंग शैली के माहिर कलाकार भदाणी ने उसके बाद हर शौचालय में बादल पेंटिंग बनाकर उसकी खूबसूरती संवारने का काम करना शुरु कर दिया। यानी उस तरह की पेंटिंग जिसके बाद ऐसा लगता है कि जैसे बारिश की बूंदें गिर रही हैं।
वे शौचालय की खूबसूरती बढ़ाने के लिए उस्ता कला, बादल पेंटिंग के साथ-साथ गोल्डन आर्ट का भी खूब इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए उन्हें जिला कलेक्टर से ईनाम भी मिल चुका है और उन्होंने इस अनोखे अभियान को ‘मेरा गौरव मेरा प्रतिष्ठालय’ अभियान से जोड़ दिया है।
क्या कहते हैं भदाणी
कलाकार भदाणी कहते हैं कि मांडणे हमारी संस्कृति में खुशहाली, प्रसन्नता और प्रतिष्ठा का प्रतीक है। इसी प्रतिष्ठा को उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान के साथ जोड़ा है। शौचालय के सामने की दीवार पर उस्ता कला का चित्रण लोगों को सुखद एहसास देता है। ये पेंटिंग अपनी सुंदरता से तो लोगों के आकर्षण का केन्द्र तो बनती ही हैं, लेकिन लोगों में स्वच्छता का संदेश भी देती हैं। वे अपने गांव के साथ-साथ पूरे देश को खुले में शौच से मुक्ति दिलाना चाहते हैं।