शहरों में रातों की बढ़ती रोशनी अब सिर्फ इंसानों की दिनचर्या ही नहीं, बल्कि पेड़-पौधों के जीवनचक्र को भी प्रभावित करने लगी है। एक नए अंतरराष्ट्रीय शोध के मुताबिक कृत्रिम प्रकाश के चलते शहरी क्षेत्रों में पेड़ों की हरियाली का समय ग्रामीण इलाकों की तुलना में औसतन तीन सप्ताह तक बढ़ गया है।
इस बदलाव से मौसम और स्वास्थ्य से जुड़ी कई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। अध्ययन में 2014 से 2020 के बीच उत्तरी गोलार्ध के 428 शहरों के सैटेलाइट डाटा का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया कि शहरों में पेड़ों की पत्तियां औसतन 12.6 दिन पहले निकलती हैं और 11.2 दिन बाद झड़ती हैं। यानी हर साल शहरी हरियाली 23.8 दिन ज्यादा लंबी रहती है। अब तक माना जाता रहा था कि यह बदलाव मुख्यतः अर्बन हीट आइलैंड यानी शहरी गर्मी के कारण होता है। लेकिन इस अध्ययन ने साबित किया है कि मौसमी गतिविधियों में कृत्रिम प्रकाश अधिक अहम भूमिका निभा रहा है।
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मौसमी बदलाव नहीं पहचान पा रहे पेड़
पिछले दस वर्षों में शहरी क्षेत्रों में रात के समय कृत्रिम प्रकाश में हर साल करीब 10 फीसदी की दर से वृद्धि हुई है। खासकर एलईडी लाइट्स ने इस वृद्धि को और अधिक तीव्र कर दिया है। यह रोशनी पौधों की जैविक घड़ी को गुमराह कर देती है, जिससे वे मौसमी बदलावों को सही तरीके से पहचान नहीं पाते। नतीजतन, पत्तियों का गिरना देर से और बसंत का आगमन जल्दी होता है। अध्ययन में स्पष्ट किया गया कि पेड़ों की पत्तियों के गिरने के समय पर कृत्रिम रोशनी का असर मौसम के शुरुआत से भी अधिक होता है। पत्तियों की उपस्थिति बढ़ने से पेड़ अधिक कार्बन सोख सकते हैं पर यह बदलाव पारिस्थितिक संतुलन को भी खतरे में डाल रहा है।
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एलईडी रोशनी ने बढ़ाया भ्रम
पुराने सोडियम लैंप की जगह अब शहरों में चमकीली सफेद एलईडी लाइट्स लगाई जा रही हैं, जो अधिक मात्रा में नीली रोशनी छोड़ती हैं। पौधे इस नीली रोशनी को विशेष रिसेप्टर के माध्यम से महसूस करते हैं और इसका सीधा असर उनके विकास चक्र पर पड़ता है। हालांकि अभी तक अधिकतर सैटेलाइट नीली रोशनी को ठीक से नहीं पकड़ पाते, जिससे इसके दीर्घकालिक प्रभावों को समझना मुश्किल हो जाता है।