कुमार ने कहा, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) परियोजना में एक प्रमुख भागीदार होगा और हमें भागीदारी के एक मॉडल पर काम करने की जरूरत है, जो उद्योग की क्षमताओं का पूरी तरह से लाभ उठाते हुए खरीदार-विक्रेता प्रस्ताव से अलग होना चाहिए। असैन्य क्षेत्र में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की अपार क्षमता है और कार्य बल इस पर भी ध्यान दे रहा है।
इन हथियारों का होगा भविष्य
मानव रहित विमान, मानव रहित पोत, मानव रहित टैंक और स्वचालित रोबोटिक राइफल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सरहदों की निगहबानी
सुरक्षा बल दूसरी विश्व शक्तियों की तरह ही अपनी ऑपरेशन संबंधी तैयारियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यापक इस्तेमाल पर मजबूती से जोर दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, चीन एवं पाकिस्तान से लगी देश की सीमाओं की निगरानी में एआई के इस्तेमाल से संवेदनशील सीमाओं की सुरक्षा में लगे सशस्त्र बलों पर दबाव कम हो सकता है।
आईटी उद्योग भारत की सबसे बड़ी ताकत
रक्षा सचिव ने कहा, भारत का सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग आधार काफी मजबूत है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संबंधी क्षमताओं के विकास के लिहाज से हमारी सबसे बड़ी ताकत होगी।
चीन पर केंद्रित है प्रोजेक्ट
अपनी सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यापक इस्तेमाल की खातिर चीन तेजी से निवेश बढ़ा रहा है, ऐसे में यह परियोजना भारत की थल सेना, वायु सेना और नौसेना को भविष्य की जंग के लिहाज से तैयार करने की व्यापक नीतिगत पहल का हिस्सा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुसंधान एवं मशीनों से जुड़े अध्ययन में चीन अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। पिछले साल उसने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के लिए प्रोजेक्ट 2030 शुरू किया है। यह इनोवेशन के लिहाज से चीन को दुनिया का केंद्र बनाने की महत्वाकांक्षी योजना है।
मानव रहित ड्रोन सबसे घातक हथियार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कुशल मशीनों के निर्माण से जुड़े कंप्यूटर विज्ञान का क्षेत्र है। अमेरिका का मानव रहित ड्रोन इसका सबसे बेहतरीन और घातक नमूना है। ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से काम करते हैं।
अमेरिका इन ड्रोन के सहारे अफगानिस्तान और उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान में आतंकियों के गुप्त ठिकानों को निशाना बनाता रहा है। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, फ्रांस और यूरोपीय संघ भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में काफी निवेश कर रहे हैं।