भारत में हैजा विस्फोट के बारे में पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे उपग्रहों से प्राप्त जलवायु डाटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक की मदद से 89 फीसदी तक सफल पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय जर्नल एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। इस रिपोर्ट में पहली बार समुद्री सतह के खारेपन या पानी में नमक घोलकर हैजा के पूर्वानुमान का प्रदर्शन किया गया।
ब्रिटेन के प्लाईमाउथ मरीन लैबोरेटरी और ईएसए जलवायु कार्यालय के शोधकर्ताओं ने उत्तरी हिंद महासागर के पास हैजा विस्फोट की भविष्यवाणी पर अपना शोध केंद्रित रखा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि दुनिया में जीवाणु जनित रोग के आधे मामले 2010 से 16 के दौरान दर्ज किए गए। इस शोध कार्य का नेतृत्व करने वाले एमी कैम्पबेल ने कहा कि इस मॉडल ने आशाजनक परिणाम दिए हैं और हैजा के विभिन्न निगरानी डाटा सेट के इस्तेमाल से इस काम को करने की काफी संभावनाएं हैं।
गौरतलब है कि हैजा एक जल जनित बीमारी है, जो दूषित जल या भोजन के कारण होता है और यह पूरी दुनिया के तटीय क्षेत्रों खासकर घनी आबादी वाले इलाकों होता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि ग्लोबल वार्मिंग और मौसम की चरम घटनाओं के कारण यह बीमारी दुनियाभर में हर साल 13 लाख से 40 लाख लोगों को प्रभावित करती है और इसमें 1,43,000 लोगों की मौत हो जाती है।