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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म, अब एक देश एक झंडा एक विधान, यहां जानें सब कुछ

Tue, 06 Aug 2019 06:17 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म, अभिन्न अंग बना रहेगा
  • अब केंद्रशासित प्रदेश बनेगा जम्मू कश्मीर और लद्दाख 
  • राज्य पुनगर्ठन बिल को राज्यसभा की मिली मंजूरी
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धारा 370 (ग्राफिक्स) - फोटो : अमर उजाला (ग्राफिक्स)
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विस्तार
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एक राज्य, दो झंडे और दो विधान अब बीती बात हो गई है। मोदी सरकार ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसले में जम्मू कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के साथ ही राज्यसभा में राज्य पुनगर्ठन बिल के जरिए सूबे को दो हिस्सों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांट कर इन्हें केंद्रशासित प्रदेश घोषित करने का प्रस्ताव रखा है। इनमें जम्मू कश्मीर को विधायिका शक्ति वाला तो लद्दाख को बिना विधायिका शक्ति वाला केंद्रशासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव है। 

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बिल पर राज्यसभा ने सोमवार को ही मुहर लगा दी। लोकसभा में बिल पर मुहर लगते ही जम्मू कश्मीर न सिर्फ विशेष राज्य का दर्जा खो देगा, बल्कि पूर्ण राज्य के रूप में इसका अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। सोमवार को जब गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370(1) में निहित शक्तियों का उपयोग करते हुए इस अनुच्छेद के अन्य सभी खंडों को निरस्त करने का संकल्प पेश किया तो पूरा सदन हक्का बक्का रह गया।

इसके साथ ही जब शाह ने राज्य पुनगर्ठन बिल के जरिए राज्य को दो हिस्सों में बांटने, पूर्ण राज्य की जगह इन्हें केंद्रशासित प्रदेश घोषित करने संबंधी प्रस्ताव रखा तो सदन में एकबारगी भूचाल आ गया। शाह ने संकल्प और बिल पेश करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 में समय समय में संशोधन होता रहा है। अब जरूरी है कि राज्य से आतंकवाद के खात्मे और विकास के लिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए।
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निरस्त करने के लिए खंड एक का इस्तेमाल

दरअसल अनुच्छेद 370 में संशोधन करने का अधिकार इसके खंड एक में निहित है। संकल्प में इसी खंड एक का इस्तेमाल करते हुए अन्य सभी खंडों को निरस्त किया गया है। जम्मू-कश्मीर के केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद कानून व्यवस्था, सेवा, भूमि सहित कई अन्य अधिकार केंद्र के पास होंगे। ऐसे में वहां भविष्य में राज्य सरकार की भूमिका बेहद सीमित हो जाएगी। दिल्ली की तरह यहां भी उपराज्यपाल की भूमिका अहम होगी।

ये होंगे महत्वपूर्ण बदलाव

  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी लागू होगी भारतीय दंड संहिता
  • राज्य का अपना अलग संविधान खत्म
  • राज्य का अलग झंडा भी नहीं रहेगा
  • छह साल की जगह अन्य राज्यों की तरह 5 साल का होगा विधानसभा का कार्यकाल
  • पूर्ण राज्य और विशेष राज्य का दर्जा होगा खत्म
  • दो नए केंद्रशासित प्रदेशों का होगा उदय
  • पूर्ण राज्य की संख्या 29 से घट कर होगी 28
  • चंडीगढ़ की तरह बिना विधायिका शक्ति वाला केंद्रशासित प्रदेश होगा लद्दाख


इनका विरोध, इनका समर्थन और इनका वाक आउट
राज्य पुनगर्ठन बिल का राजग के इतर बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी ने समर्थन किया। कांग्रेस, डीएमके ने किया विरोध तो सहयोगी जदयू, सपा ने किया वाकआउट।

लोकसभा में आज होगा पेश
राज्य पुनगर्ठन बिल लोकसभा में मंगलवार को पेश होगा। चूंकि इस सदन में सरकार के पहले से ही बहुमत हासिल है। इसके अलावा इस बिल पर उसे बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस और बीएसपी का समर्थन हासिल है। ऐसे में इस बिल के कानूनी जामा पहनने की अब महज औपचारिकता ही बाकी है।

अमित शाह - फोटो : ANI
कांग्रेस को मुख्य सचेतक ने ही दिया झटका

बिल पेश होने से पहले कांग्रेस को उसके मुख्य सचेतक और राज्यसभा सदस्य भुवनेश्वर कालिता ने बड़ा झटका दिया। सुबह करीब नौ बजे सरकार के खिलाफ कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश करने वाले कालिता ने अचानक साढ़े दस बजे पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया।

कालिता ने कहा कि खुद प्रथम पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अनुच्छेद 370 को अस्थाई बताया था। उन्होंने कहा था कि यह अनुच्छेद धीरे धीरे घिसते घिसते खत्म हो जाएगा। अब कांग्रेस मुझे इसी का विरोध करने केलिए व्हिप जारी करने के लिए कह  रही है। ऐसे में मैंने पार्टी छोडना उचित समझा।

पीडीपी सांसदों पर कार्रवाई तय 

सोमवार को संकल्प और बिल पेश होने के दौरान संविधान की प्रतियां फाडने वाले पीडीपी के सांसदों मीर मोहम्मद फैयान और नजीर अहमद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है। इन सांसदों ने बिल पेश होने के दौरान पहले अपने कपड़े फाड़े इसके बाद संविधान की प्रतियां फाडनी शुरू कर दी।

इससे नाराज सभापति वैंकया नायडू ने इन सांसदों को मार्शल के माध्यम से सदन से बाहर निकलवाया। सूत्रों ने बताया कि इस घटना से सभापति बेहद नाराज हैं। वह मंगलवार को इन सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं।

आजाद बोले: भाजपा ने देश का सिर काट लिया 

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने धारा 370 हो हटाने के फैसले पर कहा कि भाजपा की सरकार ने देश का सिर काट लिया है और यह भारत के साथ गद्दारी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने चीन और पाकिस्तान की सीमा से लगे संवेदनशील राज्य के साथ खिलवाड़ किया है जिसका उनकी पार्टी और दूसरे विपक्षी दल सदन के अंदर और बाहर पुरजोर विरोध करेंगे। सीमावर्ती राज्य में वहां की जनता को साथ लिए बिना सिर्फ सेना की बदौलत दुश्मन से नहीं लड़ा जा सकता। 

उन्होंने कहा कि धारा 370 ने जम्मू-कश्मीर को एक सूत्र में बांधकर रखा था लेकिन सरकार ने सत्ता के नशे में और वोट हासिल करने के लिए राजनीतिक, संस्कृति और भूगोल से भिन्न तरह के राज्य में एक झटके में तीन-चार चीजों को खत्म कर दिया।  जम्मू-कश्मीर के लाखों लोगों ने भारत के साथ बनाए रखने के लिए कुर्बानी दी है। अब राज्य में राज्यपाल नहीं बल्कि उपराज्यपाल होगा ऐसा करने से राज्य का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले विपक्ष बोलता था तो लोकसभा और राज्यसभा टीवी में दिखता था लेकिन सुबह 11 बजे से कांग्रेस और विपक्षी दल सदन में धरना दे रहे हैं जिसे नहीं दिखाया जा रहा है। 

चिदंबरम बोले- संविधान के अनुच्छेदों की गलत व्याख्या की 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने जो किया है वो प्रत्याशित और जोखिम भरा है। सरकार ने संविधान के अनुच्छेदों की गलत व्याख्या की है। मैं सभी राजनीतिक दलों, राज्यों और देश की जनता से कहना चाहता हूं कि भारत का विचार गंभीर खतरे में है। यह भारत के संवैधानिक इतिहास का बहुत खराब दिन है। 
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इधर,लाल दुर्ग में भी मना कश्मीर की आजादी का जश्न

लाल दुर्ग कहे जाने वाले जेएनयू में सोमवार को कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की खुशी में जश्न का माहौल दिखा। कैंपस में एबीवीपी ने एकता और अखंडता यात्रा निकाली। इसमें आम छात्रों के साथ-साथ शिक्षक भी शामिल हुए। इस मौके पर छात्रों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे भी लगाए। जेएनयू कैंपस स्थित गंगा ढाबा से चंद्रभागा हॉस्टल तक सोमवार देर शाम कश्मीर की आजादी के नाम एकता व अखंड़ता यात्रा निकाली गई। इसका आयोजन एबीवीपी की जेएनयू इकाई की ओर से किया गया था।

एबीवीपी के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री श्रीनिवास जी ने कहा कि अभाविप मोदी सरकार के इस साहसिक कदम का स्वागत करती है। लगता है कि आज भारत को फिर से एक पटेल मिल गया। इकाई अध्यक्ष दुर्गेश कुमार ने कहा कि आज स्वर्ग में श्यामा प्रसाद जी की आत्मा प्रसन्न हो रही होगी। अनुच्छेद-370 को हटाकर ही पटेल, आंबेडकर, कलाम और अटल जी के सपनोँ के अखंड भारत की संकल्पना को सच करना है। 

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