आर्ट ऑफ लिविंग (एओएल) को बीते वर्ष मार्च में यमुना डूब क्षेत्र में विश्व संस्कृति महोत्सव कराना मंहगा पड़ा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कार्यक्रम के कारण यमुना डूब क्षेत्र के नुकसान और उसकी पर्यावरणीय क्षति का एओएल को जिम्मेदार माना है। वैसे प्रधान पीठ ने एओएल पर शुरुआती पांच करोड़ रुपये के बाद कोई अतिरिक्त पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति नहीं लगाया है।
पीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को एओएल की ओर से जमा कराए जा चुके पांच करोड़ रुपये को डूब क्षेत्र की बेहतरी के लिए खर्च करने को कहा है। पीठ ने कहा कि एओएल के जरिए जमा कराए जा चुके 5 करोड़ रुपये में से यदि कुछ बचता है तो उन्हें लौटा दिया जाए और यदि बजट बढ़ जाए तो उनसे वसूला जाए। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह फैसला याची मनोज मिश्रा की याचिका पर सुनाया। एनजीटी के इस फैसले में पीठ के एक सदस्य जस्टिस आरएस राठौर ने खुद को अलग कर लिया।
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