एनजीटी ने मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लिया
पैनल एक मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने एक मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लिया था। रिपोर्ट में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कुछ इलाकों में भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा जायज सीमा से ज्यादा होने की बात कही गई थी। एनजीटी ने हाल के एक आदेश में कहा कि रिपोर्ट में कहा गया है कि 25 राज्यों के 230 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में आर्सेनिक पाया गया, जबकि 27 राज्यों के 469 जिलों के कुछ हिस्सों में फ्लोराइड पाया गया।
सीजीडब्ल्यूए ने मानी भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड की मौजूदगी की बात
न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने कहा कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) ने एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें उसने जिलों और राज्यों में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मौजूदगी की बात मानी है। पीठ ने कहा, 'यह भी स्वीकार किया जाता है कि दोनों रसायनों या धातुओं का मानव शरीर और स्वास्थ्य पर बहुत गंभीर विषाक्त प्रभाव पड़ता है और स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा होता है।'
केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने कदम नहीं उठाया
पीठ ने कहा कि भूजल के नियमन के लिए जिम्मेदार केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने इस आधार पर कोई स्वतंत्र कदम नहीं उठाया कि जल राज्य का विषय है। लेकिन 1997 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और 2022 के अधिकरण के आदेश द्वारा इसकी दलील को खारिज कर दिया गया था। इसने कहा, 'हम आश्चर्यचकित हैं कि इतने लंबे समय के बाद आज भी सीजीडब्ल्यूए ने अपनी वैधानिक जिम्मेदारी और दायित्वों से पल्ला झाड़ने और ऐसे कमजोर आधार अपनाने का दुस्साहस किया है, जिन्हें शीर्ष अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है।'
तत्काल निवारक और सुरक्षात्मक कदम उठाने की जरूरत
अधिकरण ने कहा, 'इतनी बड़ी मात्रा में राज्यों और जिलों के भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मौजूदगी के जुड़े मामले में उठाया गया मुद्दा बहुत गंभीर है और सभी संबंधित अधिकारियों द्वारा तत्काल निवारक और सुरक्षात्मक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।'