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Chhattisgarh: ननों की गिरफ्तारी पर बवाल, मेघालय से उठी रिहाई की मांग; कैथोलिक संगठन ने सीएम को लिखी चिट्ठी

Thu, 31 Jul 2025 11:54 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिलांग

सार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्टेशन पर दो ननों और एक महिला की गिरफ्तारी पर विवाद गहराया है। उन पर जबरन धर्मांतरण और मानव तस्करी का आरोप है। ऐसे में अब मेघालय के कैथोलिक संगठन ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिख आरोपों को झूठा बताया है। साथ ही रिहाई की मांग भी की है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) द्वारा दो नन प्रीति मेरी, वंदना फ्रांसिस और एक अन्य महिला सुकामन मंडावी की गिरफ्तारी का मामले में चर्चा तेज होती जा रही है। ऐसे में अब मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में कैथोलिक ईसाइयों के एक संगठन कैथोलिक एसोसिएशन ऑफ शिलॉन्ग (सीएएस) ने भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर इन दो ननों की गिरफ्तारी पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने आरोपों को बेबुनियाद और झूठा बताया है।

बता दें कि ये पूरा मामला 25 जुलाई का है। जब छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने नन प्रीति मेरी, वंदना फ्रांसिस और एक अन्य महिला सुकामन मंडावी को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि ये तीनों महिलाएं नारायणपुर जिले की तीन युवतियों को धार्मिक रूपांतरण और मानव तस्करी के इरादे से ले जा रही थीं। शिकायत बजरंग दल के एक स्थानीय पदाधिकारी ने दर्ज कराई थी।

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क्या है संगठन का पक्ष, समझिए
वहीं मामले में पूर्व सांसद विन्सेंट एच पाला के नेतृत्व वाले कैथोलिक एसोसिएशन ऑफ शिलॉन्ग ने कहा कि गिरफ्तार महिलाएं सिर्फ तीन युवतियों को रोजगार के लिए लेकर जा रही थीं और उनके माता-पिता की अनुमति भी थी। तीनों युवतियां 18 साल से ऊपर की हैं। संगठन ने कहा कि ये महिलाएं केवल सेवा भाव से काम करती हैं, उनका काम जाति, धर्म या पंथ से ऊपर होता है। यह घटना संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
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आरोपों पर सवाल
साथ ही एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि बजरंग दल के सदस्यों ने सांप्रदायिक मानसिकता से इस गिरफ्तारी को अंजाम दिलवाया, ना कि किसी पुख्ता सबूत के आधार पर। संगठन ने इसे एक उत्पीड़न की घटना बताया और मुख्यमंत्री से तुरंत और बिना शर्त रिहाई की मांग की।

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बताया अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन

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गौरतलब है कि गिरफ्तार ननें असीसी सिस्टर्स ऑफ मैरी इमैक्युलेट नामक एक संस्था से जुड़ी है। ननों की गिरफ्तारी के बाद संगठन ने भी नाराजगी जताई है। साथ ही कहा है कि यह पूरी कार्रवाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन है और धर्मांतरण कानूनों के दुरुपयोग का उदाहरण है। कैथोलिक संगठन ने सरकार से मांग की कि अल्पसंख्यकों को बिना डर अपने धर्म का पालन करने और समाज सेवा करने की आजादी दी जाए। साथ ही धर्मांतरण कानूनों के गलत इस्तेमाल को रोका जाए।

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