रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी एक समाचार कार्यक्रम के दौरान धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में मुंबई पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज की गई नई प्राथमिकी निरस्त कराने के लिए मंगलवार को न्यायालय पहुंचे।
इस मामले से जुड़े एक वकील ने बताया कि अर्णब गोस्वामी ने अपनी नई याचिका में शीर्ष अदालत से अनुरोध किया है कि दो मई को दर्ज प्राथमिकी के संबंध में आगे किसी भी तरह की जांच से प्राधिकारियों को रोका जाए।
अर्णब के रवैये के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की याचिका के एक दिन बाद रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक ने शीर्ष अदालत में यह याचिका दायर की है। पालघर में दो साधुओं सहित तीन व्यक्तियों की पीट-पीट कर हत्या के मामले में कुछ मानहानिकारक टिप्पणियों की वजह से आपराधिक मामले में जांच का सामना कर रहे अर्णब पर महाराष्ट्र सरकार का आरोप है कि वह पुलिस के मन में भय पैदा कर रहे हैं।
मुंबई पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार मुंबई में दो मई को अर्णब और दो अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि उपनगर बांद्रा में स्थित एक मस्जिद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करके उन्होंने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
इस अधिकारी ने प्राथमिकी का जिक्र करते हुये बताया कि गोस्वामी ने 14 अप्रैल को अपने कार्यक्रम में मस्जिद की तस्वीर दिखाते हुये इसके बाहर बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर सवाल उठाया था।
यह प्राथमिकी दो मई को पायधोनी थाने में रजा एजुकेशन वेलफेयर सोसायटी के सचिव इरफान अबूबकर शेख ने दर्ज कराई है। महाराष्ट्र सरकार ने अपने इस आवेदन में अर्णब गोस्वामी को अपने अंतरिम संरक्षण का दुरूपयोग नहीं करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया है।