हाईकोर्ट ने कहा कि सेना की सर्विस में उच्चतम शारीरिक फिटनेस का होना जरूरी है। अदालत ने सेना की सेवा में अयोग्य ठहराए गए एक व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति वी.के. राव की खंडपीठ ने अपने फैसले में केंद्र सरकार के उस तर्क को स्वीकार कर लिया कि याचिकाकर्ता के दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली में दोष है। इस दोष के कारण वह प्रतिकूल प्रभावी ढंग से हथियारों के ट्रिगर का उपयोग करने में पूरी तरह सक्षम नहीं है।
अदालत ने याची प्रवेश के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें उसे सेना में सर्विस के लिए स्थायी रूप से अयोग्य करार दिया था। याची ने आग्रह किया था कि सेना को उसे चेन्नई में प्री-कमीशन ट्रेनिंग पूरी करने की इजाजत प्रदान करने का निर्देश दिया जाए।