Army Marks Infantry Day: हर साल 27 अक्तूबर को इन्फैंट्री डे मनाया जाता है। यही वह दिन है जब 1947 में भारतीय सेना की पैदल टुकड़ी पहली बार श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरी थी। इन सैनिकों ने पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों को पीछे धकेलते हुए जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा सुनिश्चित की थी।
भारतीय सेना ने सोमवार को देशभर में इन्फैंट्री डे (पैदल सेना दिवस) बड़े सम्मान और गर्व के साथ मनाया। इस अवसर पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) पर जाकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
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वीरता और बलिदान को नमन
सेना प्रमुख ने अमर चक्र पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले पैदल सैनिकों की वीरता को सलाम किया। इस मौके पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, सेवारत जवान, पूर्व सैनिक और शहीदों के परिजन भी उपस्थित रहे।
तीन सम्मानित युद्ध दिग्गजों भी हुए शामिल
इस कार्यक्रम में तीन सम्मानित युद्ध दिग्गजों ने भी भाग लिया। इसमें मेजर अशीष सोनल (वीर चक्र, सेवानिवृत्त) - ऑपरेशन पवन (1990) के योद्धा; सूबेदार मेजर एवं मानद कप्तान कुंवर सिंह (वीर चक्र, सेवानिवृत्त) - ऑपरेशन मेघदूत (1989) के सहभागी और लांस नायक अमृत (वीर चक्र, सेवानिवृत्त) - ऑपरेशन कैक्टस लिली (1971) के योद्धा शामिल रहे। इन वीर सैनिकों ने इन्फैंट्री वेटरन्स की ओर से स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया।
देशभर में आयोजन
इन्फैंट्री डे को 'शौर्य दिवस' के रूप में भी जाना जाता है। इस अवसर पर देशभर में कई कार्यक्रम हुए, इसमें उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में फील्ड मार्शल केएम करियप्पा मेमोरियल सेमिनार, दिल्ली कैंटोनमेंट में शौर्यवीर रन का आयोजन, वीर नारियों का सम्मान समारोह, इसके साथ ही, 'इन्फैंट्री मैगजीन' का भी विमोचन किया गया, जिसमें पैदल सेना की नई क्षमताओं और उनके पराक्रम की गाथाओं को विस्तार से बताया गया है।
देश की रक्षा का प्रतीक
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह दिन भारतीय पैदल सेना के अटूट समर्पण, साहस और देशभक्ति की याद दिलाता है। इन्फैंट्री ने हर युग में सीमा की रक्षा करते हुए देश की संप्रभुता और अखंडता को सुरक्षित रखा है।