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सेना ने सरकार को सौंपे सर्जिकल अटैक के सबूत, फिलहाल नहीं होंगे सार्वजनिक

Wed, 05 Oct 2016 10:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली 
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- फोटो : File Photo
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सेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार आतंकी ठिकानों पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक के वीडियो फुटेज सरकार को सौंप कर इस पर उठ रहे सवालों और आशंकाओं को शांत कर दिया है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने बुधवार को बताया कि इस तरह के मामलों के संदर्भ पेश करने की एक प्रक्रिया होती है जिसका सेना और सरकार ने यथोचित पालन किया है। हालांकि सबूतों को सार्वजनिक करने के फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की सुरक्षा समिति कमेटी (सीसीएस) की बैठक में आमराय नहीं बन पाई लेकिन अहीर के मुताबिक इस पर फैसला पीएम को ही करना है।
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सीसीएस की बैठक में सेना इसे सार्वजनिक करने के हक में थी, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल सहित खुफिया एजेंसियां ऐसा नहीं चाहती थीं। इस मामले में कमेटी के सदस्यों की राय भी बंटी हुई थी। प्रधानमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस बारे में अब सेना और रक्षा मंत्रालय ही कोई प्रतिक्रिया देगा। सर्जिकल अटैक का सबूत सामने तो आएगा, मगर सरकार इसके लिए जल्दबाजी में नहीं है। सेना की ओर से इससे संबंधित वीडियो फुटेज सौंपे जाने के बाद ढाई घंटे चली सीसीएस की बैठक में गंभीर मंथन हुआ। सूत्रों के मुताबिक डोभाल ने राय दी कि इसे सार्वजनिक किए जाने से कूटनीतिक मोर्चे पर प्रतिकूल असर होगा। खुफिया एजेंसियां भी डोभाल की राय से सहमत थीं। हालांकि सेना का कहना था कि सबूत सार्वजनिक करने पर उसे कोई एतराज नहीं है। इसके बाद तय हुआ कि इस पर प्रधानमंत्री ही अंतिम फैसला करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक वीडियो फुटेज की संख्या दो दर्जन से भी ज्यादा है। इसमें सर्जिकल अटैक की तैयारी से लेकर अटैक के बाद की तस्वीरें शामिल हैं।
बैठक में डोभाल ने सर्जिकल अटैक के बाद एलओसी और जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर एक विस्तृत प्रस्तुति देने के साथ ही सेना की तैयारियों की जानकारी दी। बैठक में सेना की ओर से की गई तैयारियों से भी प्रधानमंत्री को अवगत कराया गया।
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सबूत मांगने वालों के सुर बदले 

- फोटो : File Photo
इस बीच, सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने सर्जिकल अटैक का सबूत मांगने वालों की जमकर खबर ली। उन्होंने कहा कि एक ओर पाकिस्तान सबूत मांग रहा है तो दूसरी ओर अपने देश में भी कई नेता सबूत मांग रहे हैं। देश को सेना पर भरोसा है। ऐसे में सबूत मांग कर राजनीति करने वालों को जवाब देना जरूरी नहीं है। उधर, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने भी कहा कि हर किसी को सरकार पर भरोसा करना चाहिए और सेना को अपने तरीके से काम करने देना चाहिए। इस मामले में उचित प्रक्रिया अपनाई गई। डीजीएमओ ने ही सर्जिकल स्ट्राइक पर प्रेस कांफ्रेंस की, रक्षा मंत्री या प्रधानमंत्री या गृह मंत्री ने इसकी जानकारी नहीं दी। यही सही था। अहीर ने पत्रकारों को बताया अब वक्त बदला तो सेना ने फुटेज भी सौंप दिए। दोनों गृह राज्यमंत्रियों ने ऐसे समय में बयान दिए हैं जब सरकार से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत पेश करने की चौतरफा मांग उठने लगी।

बयानबाजी से बचें मंत्री: मोदी 
सर्जिकल स्ट्राइक पर सरकार और विपक्ष में तीखी होती नोकझोंक के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपने कैबिनेट सदस्यों को इस पर बयानबाजी और उन्माद से बचने की हिदायत दी है। समझा जाता है कि उन्होंने कैबिनेट की बैठक में अपने मंत्रियों से कहा कि इस मामले पर सिर्फ अधिकृत व्यक्तियों को ही बोलना चाहिए, अन्य किसी को इस पर कुछ भी बयान देने से बचना चाहिए।

सबूत मांगने वालों के सुर बदले 
सरकार को सर्जिकल स्ट्राइक के वीडियो फुटेज सौंपते ही सरकार से सबूत मांगने वाले विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस और दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के सुर अचानक बदल गए हैं। कांग्रेस ने कहा कि पाकिस्तान के दुष्प्रचार का जवाब देने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। वहीं आप नेता और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल के बयान को भाजपा और मीडिया ने तोड़-मरोड़ कर पेश किया। कांग्रेस के प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने पत्रकारों से कहा कि हम एक बार फिर सरकार से अनुरोध करते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा का ध्यान रखते हुए ही वह पाक के झूठ को बेनकाब करने के लिए सभी सूचनाओं, सबूतों और साधनों का इस्तेमाल करे। सबूत मांगने वाले पार्टी के नेताओं पी. चिदंबरम और संजय निरूपम के बयानों को भी उन्होंने व्यक्तिगत बयान करार दिया। 
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