भारतीय सेना में वर्षों तक सेवा देने वाले सैनिकों और अधिकारियों की विदाई तो आम बात है, लेकिन इस बार विदाई एक वफादार ‘आर्मी डॉग’ को मिली है। सात साल तक देश की रक्षा में सेवा देने वाले विस्फोटक खोजी डॉग ‘रोबो’ को गुरुवार को भावनात्मक माहौल में रिटायर किया गया। सेना के जवानों ने उसे सलामी दी और उसकी निष्ठा, बहादुरी और सेवा के लिए आभार जताया।
रोबो भारतीय सेना का एक प्रशिक्षित ‘विस्फोटक खोजी डॉग’ था। उसे रीमाउंट एंड वेटरिनरी कॉर्प्स सेंटर एंड कॉलेज में गहन प्रशिक्षण के बाद सेना में शामिल किया गया था। अक्तूबर 2018 में उसने सक्रिय सेवा जॉइन की थी। अपनी सात साल की सेवा अवधि में उसने काउंटर-इंसर्जेंसी और आंतरिक सुरक्षा अभियानों में अहम भूमिका निभाई। उसकी तीव्र सूंघने की क्षमता और सटीक पहचान की बदौलत कई बार सेना ने संभावित खतरों को टाल दिया।
अभियानों में बहादुरी और भूमिका
सेवा के दौरान ‘रोबो’ ने कई अहम ऑपरेशनों में हिस्सा लिया। वह हमेशा सैनिकों के साथ अग्रिम मोर्चों पर तैनात रहा और हर अभियान में अपनी सजगता और साहस से योगदान दिया। उसकी सतर्कता ने कई बार बड़े हादसों को रोका। उसकी विस्फोटक पहचानने की क्षमता ने न केवल सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि कई अभियानों को सफल बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई। उसकी निष्ठा ने उसे सैनिकों के बीच एक विशेष स्थान दिलाया।
सम्मान और भावनात्मक विदाई समारोह
सेवानिवृत्ति के अवसर पर सेना ने एक भावनात्मक समारोह आयोजित किया। इस मौके पर ‘रोबो’ के हैंडलर और साथी सैनिकों ने उसे सलामी दी। समारोह के दौरान माहौल भावनाओं से भरा हुआ था। सैनिकों ने कहा कि रोबो केवल एक डॉग नहीं था, बल्कि यूनिट का एक वफादार साथी था, जिसने हर पल देश की सेवा को प्राथमिकता दी। सभी ने उसकी बहादुरी और वफादारी को नमन किया।
सेना की श्रद्धांजलि और प्रेरणादायक विरासत
भारतीय सेना ने कहा कि ‘रोबो’ की निष्ठा, अनुशासन और साहस सेना के ‘कैनाइन वॉरियर्स’ की भावना का प्रतीक है। उसकी सेवा और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। सेना ने इस अवसर पर कहा कि रोबो जैसे योद्धा हमारी सीमाओं की सुरक्षा के सच्चे प्रहरी हैं। उनकी विरासत उन सभी को प्रेरित करती रहेगी जो राष्ट्र सेवा को सम्मान और गर्व के साथ निभाते हैं।