भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने बृहस्पतिवार को स्वदेश निर्मित 100वीं के-9 वज्र तोप को सेना में शामिल करने के लिए हरी झंडी दिखाई। यह तोप सूरत के करीब हजीरा में लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) की निर्माण इकाई में भारतीय सेना में शामिल की गई।
उधर, सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने तीन के-9 वज्र हॉवित्जर तोप को लद्दाख के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तैनात किया है, जो बुधवार को लेह पहुंच गईं हैं। वहां से इन्हें परीक्षण के लिए ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बने सैन्य बेस पर ले जाया जाएगा। यह तैनाती इन तोपों की ऊंचे पहाड़ी इलाकों में दुश्मन के खिलाफ मारक क्षमता परखने के लिए की गई है। सूत्रों के मुताबिक, इस परीक्षण में सफल रहने के बाद भारतीय सेना पर्वतीय अभियानों के लिए इन स्वचालित तोपों की दो या तीन अतिरिक्त रेजीमेंट बनाने के लिए नई खरीद का आदेश दे सकती है।
भारतीय सेना ने बताया कि एलएंडटी ने सेना को 100 के-9 वज्र-टी स्वचालित तोप की सप्लाई की हैं, जिन्हें पिछले दो साल में विभिन्न रेजीमेंटों में तैनात किया गया है। बृहस्पतिवार को सौंपी गई तोप इस खेप का आखिरी हिस्सा थी। इन 100 तोप की आखिरी खेप की डिलीवरी सेना प्रमुख की निगरानी में ली गई। इससे पहले पिछले साल जनवरी में 51वीं के-9 वज्र की डिलीवरी लेने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हजीरा पहुंचे थे।
बोफोर्स तोप कांड के बाद से थमी थी भारी आर्टिलरी की खरीद
बता दें कि भारतीय सेना में बोफोर्स तोप कांड के बाद साल 1986 से कोई भारी आर्टिलरी शामिल नहीं की गई थी, इस लिहाज से 100 के-9 वज्र-टी तोपों को सेना में शामिल किया जाना बेहद अहम माना जा रहा है। के-9 वज्र के अलावा धनुष, एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों को भी सेना में शामिल किया जा चुका है। अब सेना में शामिल होने का अगला नंबर रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) की तरफ से विकसित की गई एडवांस्ड टॉउड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) का माना जा रहा है।
एक नजर में के-9 वज्र हॉवित्जर
- दक्षिण कोरियाई हॉवित्जर के-9 थंडर का भारतीय संस्करण हैं के-9 वज्र स्वचालित तोप
- 38 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली के-9 जीरो रेडियस पर चारों तरफ घूमकर करती है वार
- 155 एमएम/52 कैलिबर की 50 टन वजनी तोप से फेंका जाता है 47 किलो का गोला
- 15 सेकंड के अंदर 3 गोले दागने की है क्षमता, सड़क और रेगिस्तान में बराबर संचालन क्षमता
मेक इन इंडिया से निर्माण, 80 फीसदी स्वदेशी
- दक्षिण कोरियाई कंपनी हान्वा टेकविन ने दी तकनीक, एलएंडटी ने किया निर्माण
- मई, 2017 में रक्षा मंत्रालय ने वैश्विक बोली के जरिये दिया था एलएंडटी को ऑर्डर
- 4500 करोड़ रुपये में 100 के-9 वज्र निर्मित करने का दिया गया था ऑर्डर
- गुजरात के हजीरा में इसके लिए जनवरी, 2018 में शुरू की गई निर्माण इकाई
- नवंबर, 2018 में भारतीय सेना में शामिल की गई थी पहली के-9 वज्र हॉवित्जर
- 80 फीसदी स्वदेशी कार्य पैकेज के निर्माण में 1000 एमएसएमई कंपनियों ने बनाए पुर्जे
- 13000 से ज्यादा पुर्जे हर तोप के लिए चार राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक व तमिलनाडु में बनाए गए