सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने स्पष्ट रूप से कहा, भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम का मतलब यह नहीं है कि आतंक के खिलाफ लड़ाई पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने कहा, यह मानने का कोई कारण नहीं है कि पाकिस्तान की सेना ने नियंत्रण रेखा से सटे आतंक के ढांचे नष्ट कर दिए।
जरनल नरवणे ने कहा, भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम ने शांति की भावना में दिया योगदान
जनरल नरवणे ने एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कहा, दोनों देशों की सेनाओं की ओर से जारी संघर्षविराम ने शांति और सुरक्षा की भावना में अहम योगदान दिया। दोनों देशों के बीच संबंधों के सुधार की दिशा में यह पहला अहम कदम है।
सेना प्रमुख ने यह भी कहा, जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के प्रयासों और आतंकी घटनाओं में में कमी भारत-पाकिस्तान के अच्छे संबंधों को बढ़ावा देने की दिशा में एक लंबा सफर तय करेगी। जनरल नरवणे ने कहा, संघर्षविराम का जिक्र करते हुए कहा कि समझौता लागू होने के बाद दोनों सेनाओं द्वारा सीमा पार से गोलीबारी की एक भी घटना नहीं हुई।
हालांकि, जम्मू सेक्टर में पाकिस्तानी रेंजरों से जुड़ी एक घटना हुई थी। उन्होंने कहा, इस साल हमने जम्मू-कश्मीर में हिंसा के स्तर में भारी कमी देखी है। सुरक्षा बल और अन्य सरकारी एजेंसियां आतंकवादी समूहों पर दबाव बनाए रखने पर काम कर रही है।
अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को बुलाना खतरनाक
सेना प्रमुख ने कहा, अफगानिस्तान से 11 सितंबर तक अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने संबंधी जो बाइडन प्रशासन के फैसले का जिक्र करते हुए कहा, चाहे उनकी अक्षमता हो या अनिच्छा दोनों समान रूप से खतरनाक और चिंताजनक हैं। इस साल हमने जम्मू और कश्मीर में हिंसा के स्तर में भारी कमी देखी है। सुरक्षा बल और अन्य सरकारी एजेंसियां आतंकवादी समूहों पर दबाव बनाए रखने पर काम कर रही है।
हम नहीं चाहते कि कश्मीर के युवा ड्रग्स, अपराध या हिंसा में लिप्त हों
सेना प्रमुख ने कहा, हम इन घटनाओं की निगरानी करना जारी रखते हैं और एक मजबूत घुसपैठ रोधी ग्रिड बनाए रखते हैं। हम नहीं चाहते कि जम्मू-कश्मीर के युवा ड्रग्स, अपराध या हिंसा में लिप्त हों। उन्होंने कहा, कश्मीर के युवाओं ने खेल और शिक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया है और अपने परिवारों, अपने गांव, शहर, जिले और केंद्रशासित प्रदेश का नाम रोशन किया है।