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युद्ध स्मारक पहुंच थलसेनाध्यक्ष नरवणे ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि, बोले- देश पर आंच नहीं आने देंगे

Wed, 01 Jan 2020 09:04 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Manoj Mukund Naravane - फोटो : ani
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थलसेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे बुधवार सुबह दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। मंगलवार को उन्होंने थलसेना के 28वें अध्यक्ष के रूप में अपना पदभार ग्रहण किया था। जनरल एम एम नरवणे को इसके बाद सेना गार्ड ऑफ आनर देगी। 

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इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हम देश पर आंच नहीं आने देंगे। हमारी सेनाएं किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद और तैयार हैं। हम सेना ने आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को जारी रखेंगे। हम सेना के क्षमता विकास पर पूरा जोर देंगे।

मानवाधिकारों का सम्मान करेगी सेना
जनरल नरवणे ने कहा कि भारतीय सेना मानवाधिकारों के सम्मान पर विशेष ध्यान देगी। हम आम लोगों के बीच सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने पर फोकस करेंगे और मानवाधिकारों के सम्मान पर विशेष ध्यान देंगे।
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मंगलवार को पदभार संभालने के बाद जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने आतंकवाद को लेकर पड़ोसी देश पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में कहा कि उसका यह पैंतरा अधिक दिनों तक नहीं चल सकता है। आर्मी चीफ ने कहा कि भारत के पास पाकिस्तान के उकसावे या उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के किसी भी कृत्य का जवाब देने के लिए कई सारे विकल्प हैं। अगर पाकिस्तान आतंकवाद को नहीं रोकता है, तो हमारे पास एहतियातन आतंकी अड्डों पर हमला करने का अधिकार है।




उन्होंने आगे कहा, 'हमारी प्राथमिकता हर समय तैयार रहने की होगी। हम मानवाधिकार को लेकर विशेष तौर पर सम्मान देंगे। मैं वाहेगुरु से प्रार्थना करता हूं कि वह मुझे साहस और शक्ति दें तारि मैं चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के तौर पर अपने कर्तव्य को ठीक तरह से निभा पाउं। तीनों सेनाएं देश की सीमाओं को सुरक्षित रखेंगी।'  

कौन हैं नए सेनाध्यक्ष नरवणे

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को जून 1980 में सिख लाइट इन्फैंट्री की 7वीं बटालियन में कमीशन दिया गया था। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी के पूर्व छात्र हैं। अपनी 37 वर्षों की सेवा में जनरल नरवणे ने देश के पूर्वोत्तर हिस्से, जम्मू और कश्मीर सहित श्रीलंका में भारतीय शांति सुरक्षा बल के सदस्य के रूप में काम किया है।

नरवणे ने जम्मू-कश्मीर में एक राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन और पूर्वी मोर्चे पर एक इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान भी संभाली है। लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे को विशिष्ट सेवा मेडल, सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। इस साल सितंबर में सेना का उप प्रमुख का पद संभालने से पहले लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे सेना की पूर्वी कमान का नेतृत्व कर रहे थे।

सेना की यह कमान चीन से लगती 4000 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा करती है। अपने 37 साल की सेवा में उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में आतंकवाद व उग्रवाद विरोधी अभियानों, शांतिकाल में विभिन्न कमानों का नेतृत्व किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन और पूर्वी मोर्चे पर इंफैंट्री ब्रिगेड का नेतृत्व भी किया। लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे श्रीलंका भेजी गई भारतीय शांति बल का हिस्सा थे। वह म्यांमार स्थित भारतीय दूतावास में तीन साल तक डिफेंस अटैची भी रहे।

ये हैं उपलब्धियां

वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी के पूर्व छात्र हैं। उन्हें जून 1980 में सिख लाइट इंफैंट्री रेजीमेंट की 7वीं बटालियन में कमीशन मिला था। उन्हें जम्मू-कश्मीर में अपनी बटालियन की सफलतापूर्वक व प्रभावी ढंग से नेतृत्व के लिए सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा उन्हें नगालैंड में असम राइफल्स (नार्थ) के इंस्पेक्टर जनरल के तौर पर सेवाओं के लिए विशिष्ट सेवा मेडल और प्रतिष्ठित हमलावर कोर की कमान के लिए अतिविशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया।

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