आर्मी चीफ बिपिन रावत ने मंगलवार को कहा कि अब हमें बढ़ती इकोनॉमी के साथ-साथ देश की सुरक्षा पर भी ज्यादा ध्यान देना होगा। आर्मी चीफ ने कहा 'ऐसी धारणा है कि रक्षा खर्च को बोझ की तरह देखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि सरकार रक्षा क्षेत्र में जो भी खर्च करती है उसके बदले कुछ फायदा नहीं मिलता, लेकिन मैं इस धारणा को सही नहीं मानता। अगर इकोनॉमी बढ़ती है तो देश की सुरक्षा पर भी ज्यादा ध्यान देना होगा।'
पूरा रक्षा बजट सेना पर खर्च हो जाता है इस मिथ को भी मैं तोड़ना चाहता हूं। सशस्त्र बलों को आवंटित सालाना बजट का 35 फीसदी हिस्सा राष्ट्र निर्माण के योगदान में लगता है।
उन्होंने कहा कि 'किसी देश की इकोनॉमी बढ़ती है तो उसकी सैन्य ताकत भी साथ-साथ बढ़ती है। चीन आज अमेरिका को टक्कर दे रहा है क्योंकि वह इंटरनेशनल वर्ल्ड ऑर्डर में एक ताकतवर देश है।'
इंडो-पैसेफिक रीजन में चीन के उभार के बाद सभी देशों की नजरें अब भारत पर है क्योंकि वह मानते हैं कि चीन के बढ़ते उभार को भारत संंतुलित करने में कारगर साबित हो सकता है।
चीन को पछाड़ भारत की इकोनॉमी नंबर वन
बता दें कि बीते दिनों वित्त वर्ष 2017-18 के लिए जीडीपी के तीसरी तिमाही के आंकड़ों को जारी किया गया। दूसरी तिमाही के हिसाब से तीसरी तिमाही में
इकोनॉमी में बढ़त मिली है। जिसमें भारत की जीडीपी 7.2 फीसदी हो गई है जो कि चीन की जीडीपी से भी ज्यादा है।
मालूम हो कि चीन की जीडीपी मौजूदा समय में 6.8 फीसदी है। इन आंकड़ों से साफ है कि भारत की इकोनॉमी दुनिया में सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही है।