सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने गुरुवार को कहा कि यदि देश सुरक्षित होगा तो आर्थिक विकास खुद-ब-खुद होगा। ऐसे में देश के आर्थिक विकास और सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण साथ-साथ होना चाहिए।
एक सेमिनार में आम बजट में सशस्त्र बलों को हुए आवंटन का बचाव करते हुए सेनाध्यक्ष ने कहा कि देश में विदेशी निवेश के प्रवाह, देश की सीमाओं के हालात व आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य के बीच एक संबंध है।
उन्होंने कहा कि हमें निवेशकों को भरोसा दिलाना होगा कि देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और देश के अंदर के हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। इसके लिए सैन्य बलों को बजट की जरूरत होती है। रक्षा बजट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सेना के एक आंतरिक सर्वे के अनुसार, सशस्त्र बलों को आवंटित सालाना बजट का 35-37 फीसदी हिस्सा देश के निर्माण के योगदान में लगता है।
जहां सरकार नहीं पहुंचती, वहां हम देते हैं शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं
जनरल रावत ने कहा कि अगर आप देश के दूरदराज के इलाकों में सड़क और आधारभूत संरचना विकसित करते हैं, तो वहां के स्थानीय लोगों को फायदा होता है। सशस्त्र बल दूरदराज के उन इलाकों में स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा मुहैया करा रहे हैं, जहां सरकार अब तक नहीं पहुंच पाई है।