रक्षा सौदों के बिचौलिए और भगोड़े संजय भंडारी को भारत प्रत्यर्पण करने के मामले में ब्रिटेन से बड़ी खबर आई है। ब्रिटिश गृहमंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने मंगलवार को संजय भंडारी के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी।
भंडारी के प्रत्यर्पण का आदेश प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच की जा रही मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिया गया है। एजेंसी भारत सरकार की ओर से ब्रिटेन की अदालत में केस लड़ रही थी। हालांकि, भंडारी के पास अभी ब्रिटिश गृहमंत्री के आदेश और अदालत के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए 14 दिन का समय है। बता दें, यहां की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने इससे पहले नवंबर में भगोड़े संजय भंडारी के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी।
भारत में मनी लान्ड्रिंग के आरोप तय
सीबीआई और ईडी की तरफ से संजय भंडारी के खिलाफ भारत में मनी लान्ड्रिंग के आरोप तय किए गए हैं। ब्रिटेन में होने के कारण उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। भारत सरकार ने भंडारी के प्रत्यर्पण की अपील ब्रिटेन से की थी।
15 जुलाई 2020 को गिरफ्तार किया गया था
16 जून 2020 को तत्कालीन ब्रिटिश गृहमंत्री प्रीति पटेल ने भंडारी के प्रत्यर्पण आग्रह को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद 15 जुलाई 2020 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। उसे अदालत ने 1.20 लाख पाउंड की सिक्योरिटी के साथ अपना पासपोर्ट जमा कराने, मध्य लंदन स्थित घर में नजरबंद रहने और नजदीकी पुलिस स्टेशन में रोजाना हाजिरी लगाने समेत सात शर्तों के साथ जमानत दी थी।
गोपनीयता उल्लंघन कानून में वांटेड
भारत में भंडारी गोपनीयता उल्लंघन कानून में वांटेड है। उस पर काला धन सफेद करने और टैक्स चोरी के मामले भी हैं, जिन आधार पर प्रत्यर्पण की अपील हुई। फिलहाल वह ब्रिटिश कोर्ट से जमानत पर है। यूपीए सरकार के कुछ रक्षा सौदों में करोड़ाें की रिश्वत से भंडारी के संबंध जानने के लिए भी प्रत्यर्पण जरूरी है। इन सौदों के लिए उसके बैंक खातों में करोड़ों रुपया भेजा गया था। भंडारी ने फ्रांसीसी कंपनी थेल्स पर 90 करोड़ का कमीशन न चुकाने का केस भी किया है।