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त्रिशूल मामले में राधे मां पर आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज करने का आदेश

Wed, 16 Mar 2016 09:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,मुंबई।

सार

- मुंबई की एक मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने त्रिशूल लेकर यात्रा करने पर मामला दर्ज करने का दिया आदेश
- राधे मां ने पिछले साल नौ अगस्त को औरंगाबाद से मुंबई तक त्रिशूल लेकर की थी हवाई यात्रा 
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राधे मां पर आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज करने का आदेश - फोटो : PTI
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विस्तार
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खुद को देवी का अवतार बताने वाली राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर को त्रिशूल लेकर हवाई सफर करना भारी पड़ गया है। मुंबई के पश्चिम उपनगर स्थित अंधेरी की मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने उनके खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। इससे राधे मां की मुश्किलें बढ़ सकती है। 
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अंधेरी मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने एयरपोर्ट पुलिस को आदेश दिया है कि राधे मां के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया जाए। राधे मां के खिलाफ आरटीआई कार्यकर्ता असाद पटेल ने याचिका दायर की थी। उनका कहना है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट परिसर में धारदार हथियार या वस्तु ले जाना गैरकानूनी है। राधे मां ने पिछले साल नौ अगस्त को औरंगाबाद से मुंबई तक त्रिशूल लेकर हवाई यात्रा की थी। इस पर पटेल ने इसकी शिकायत एयरपोर्ट अधिकारियों से की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

इसके अलावा राधे मां पर लोगों को गुमराह करने और दहेज प्रताड़ना का भी मामला चल रहा है। राधे मां को कोई दुर्गा का अवतार बताता है, तो किसी की नजर में वह साक्षात देवी हैं, जिनके दर्शन मात्र से भक्त का बेड़ा पार हो जाता है। हालांकि दहेज उत्पीड़न मामले में कानूनी शिकंजा कसने के बाद उनके भक्तों की भीड़ कम हो गई थी। कभी उनकी भक्त रही अभिनेत्री डॉली विंद्रा से लेकर कई अन्य लोग राधे मां पर आडंबर करने का आरोप लगा चुके हैं।
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इस आरोप के बाद से उनके आश्रम में तेज आवाज में गूंजने वाले मां के जयकारे वाले गीत थम गए थे। इसके बाद राधे मां सुर्खियों से दूर हो गई थी, लेकिन अब त्रिशूल लेकर हवाई सफर करने के मामले में एक बार फिर उन पर कानूनी शिकंजा कस गया है।

कौन हैं राधे मां
पंजाब में एक साधारण परिवार में जन्मी राधे मां का असली नाम सुखविंदर हैं। घर वाले उन्हें प्यार से बब्बो कहते थे। उनकी शुरू से ही पूजा पाठ में दिलचस्पी थी। परिवार वालों की मानें तो बब्बो में दैवीय शक्तियां शुरू से ही थीं। सरदार मोहन सिंह से विवाह होने के बाद वह दोरंगला से मुकेरिया आ गईं। इसके बाद बब्बो की जिंदगी ने नया मोड़ लिया। यहां उनकी मुलाकात महंत रामदीन दास से हुई और बब्बो ने उन्हें गुरु मान लिया। इसके बाद वह मुकेरिया से मुंबई पहुंच गईं और उनके हजारों भक्त बन गए।
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