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सेवानिवृत्त वीरों को सलाम: पुणे में मनाया गया सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस, तीनों सेनाओं ने दी श्रद्धांजलि

Wed, 14 Jan 2026 11:41 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

पुणे के एयर फोर्स स्टेशन पर 10वां रक्षा बल वेटरन्स डे पूरे सम्मान के साथ मनाया गया। थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर पूर्व सैनिकों और युद्ध नायकों को श्रद्धांजलि दी। सरकार और सेना ने प्रोजेक्ट नामन जैसे कदमों के जरिए पेंशन, दस्तावेज और डिजिटल सेवाओं में सहायता का भरोसा दिलाया। 
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लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ। - फोटो : X- @PRODefRjsthn
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विस्तार
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पुणे में सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाया गया। इस अवसर पर थल, जल और वायु तीनों सेनाओं ने देश की सेवा में जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष समर्पित करने वाले पूर्व सैनिकों को नमन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य सेवानिवृत्त वीरों के योगदान को याद करना और समाज के सामने उनके त्याग, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को उजागर करना रहा। हर वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाने वाला यह दिवस पूर्व सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है।

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दक्षिणी सेना कमांडर धीरज सेठ ने पूर्व सैनिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन उन बहादुर योद्धाओं के सम्मान का दिन है, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने जीवन का बड़ा हिस्सा लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों का अनुभव और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने सभी अधिकारियों और जवानों के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि राष्ट्र उनके त्याग को कभी नहीं भूल सकता।

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सेना प्रमुख ने विकसित भारत का लक्ष्य कैसे जोड़ा?
9वें सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस कार्यक्रम में थलसेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी कहा कि यह दिन उन सभी वीरों को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने देश की सेवा में अमूल्य समय दिया। उन्होंने कहा कि देश तेजी से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और इसे हासिल करने के लिए हर नागरिक की प्रतिबद्धता जरूरी है। पूर्व सैनिक समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और उनका अनुभव विकास यात्रा को मजबूती दे सकता है।

पूर्व सैनिकों की भागीदारी पर क्या योजनाएं हैं?

  • राज्य सरकारों के समक्ष सेना की पहचान और भूमिका को सक्रिय रूप से स्थापित करने के प्रयास।
  • राज्य स्तर पर पूर्व सैनिकों को प्रशासनिक और संचालनात्मक कार्यों में शामिल करने की योजना।
  • पूर्व सैनिकों और राज्य सरकारों के बीच सहयोग का “विन-विन” मॉडल तैयार करना।
  • जिला स्तर पर भी पूर्व सैनिकों की सहभागिता पर विचार।
  • अनुभव और अनुशासन का लाभ समाज और शासन तक पहुंचाने की पहल।

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इस आयोजन के क्या मायने हैं?
पुणे में आयोजित यह कार्यक्रम केवल सम्मान समारोह नहीं रहा, बल्कि यह संदेश भी दिया गया कि पूर्व सैनिक राष्ट्र निर्माण की निरंतर प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं। उनकी भागीदारी से प्रशासनिक दक्षता बढ़ सकती है और समाज में अनुशासन व सेवा भाव मजबूत हो सकता है। तीनों सेनाओं की ओर से दी गई श्रद्धांजलि ने यह स्पष्ट किया कि देश अपने सेवानिवृत्त वीरों के योगदान को सर्वोच्च सम्मान देता है और आगे भी उन्हें राष्ट्र की प्रगति से जोड़ने के प्रयास जारी रहेंगे।

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